एग्रो को चंडीगढ़ कोर्ट से बड़ा झटका, 8.13 करोड़ की वसूली याचिका खारिज

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recovery petition rejected

कोर्ट ने मध्यस्थता निर्णय को सही मानते हुए कहा, हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं

चंडीगढ़ में पंजाब एग्रो के लिए कानूनी मोड़ सामने आया है। कंपनी द्वारा दायर ₹8.13 करोड़ की वसूली याचिका को चंडीगढ़ की अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मध्यस्थता (Arbitration) का निर्णय प्रमाणों और प्रस्तुत दस्तावेज़ों पर आधारित था और इस निर्णय में किसी प्रकार के हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं है।

जानकारी के अनुसार, पंजाब एग्रो ने एक व्यावसायिक विवाद को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। कंपनी का दावा था कि मध्यस्थता पैनल का निर्णय उनके पक्ष में नहीं हुआ और इसमें कुछ त्रुटियां हैं, जिसके आधार पर उन्होंने अदालत से पुनर्विचार की गुहार लगाई। हालांकि, अदालत ने जांच के बाद पाया कि मध्यस्थता का निर्णय साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप लिया गया था।

अदालत ने आदेश में कहा कि मध्यस्थता का उद्देश्य विवाद को निष्पक्ष और त्वरित तरीके से सुलझाना है। यदि निर्णय में कोई पारदर्शिता और प्रमाणों के आधार पर प्रक्रिया का पालन किया गया हो, तो न्यायालय को उसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। इस कारण से पंजाब एग्रो की ₹8.13 करोड़ की वसूली याचिका खारिज कर दी गई।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस आदेश का असर न केवल पंजाब एग्रो बल्कि अन्य व्यवसायिक संस्थाओं के लिए भी एक मिसाल बन सकता है। मध्यस्थता के निर्णयों को सम्मान देने की दिशा में अदालत ने स्पष्ट रुख अपनाया है। ऐसे मामलों में कंपनियों को मध्यस्थता प्रक्रिया में अपने दावे मजबूत ढंग से पेश करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि अदालत द्वारा हस्तक्षेप की संभावना बहुत सीमित होती है।

इस फैसले के बाद पंजाब एग्रो को अब तय करना होगा कि वह मध्यस्थता निर्णय के अनुसार राशि का भुगतान करेगी या अन्य कानूनी विकल्पों पर विचार करेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्यस्थता और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है, ताकि व्यावसायिक विवाद शीघ्र और निष्पक्ष तरीके से सुलझ सकें।

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