पुराने नरसंहार केस में नया मोड़, महिला दोषी की रिहाई की उम्मीद

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Relooram Case

हरियाणा के बहुचर्चित सामूहिक हत्या मामले में सजा काट रही महिला की आज रिहाई संभव बताई जा रही

हरियाणा के कुख्यात रेलूराम सामूहिक हत्या प्रकरण में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। करीब 24 साल पुराने इस मामले में दोषी करार दी गई महिला की आज जेल से रिहाई संभव मानी जा रही है। इससे एक दिन पहले ही उसके पति को रिहा किया गया था, जिसके बाद यह मामला दोबारा सुर्खियों में आ गया है।

यह मामला वर्ष 2001 का है, जब एक ही परिवार के आठ लोगों की नृशंस हत्या कर दी गई थी। उस समय इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। जांच के बाद पुलिस ने परिवार के ही सदस्यों को इस वारदात का जिम्मेदार ठहराया था। अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद महिला और उसके पति को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

पिछले कई वर्षों से दोनों सजा काट रहे थे। हाल ही में जेल प्रशासन और कानूनी प्रक्रिया के तहत उनके आचरण, सजा की अवधि और अन्य मानकों की समीक्षा की गई। इसी क्रम में पहले पति को जेल से रिहा किया गया और अब महिला की रिहाई पर भी अंतिम निर्णय की संभावना जताई जा रही है।

इस घटनाक्रम ने पीड़ित पक्ष और समाज में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं। कुछ लोगों का मानना है कि कानून के तहत तय प्रक्रिया के अनुसार रिहाई होना न्याय प्रणाली का हिस्सा है, जबकि कई लोग इतने बड़े अपराध में शामिल दोषियों की रिहाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं। पीड़ित परिवार से जुड़े लोगों का कहना है कि इतने वर्षों बाद भी जख्म पूरी तरह नहीं भरे हैं।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आजीवन कारावास का अर्थ पूरी उम्र जेल में रहना नहीं होता, बल्कि नियमों के तहत समय-समय पर समीक्षा संभव होती है। अच्छे आचरण और निर्धारित अवधि पूरी होने पर रिहाई का प्रावधान है।

यह मामला एक बार फिर यह बहस खड़ी करता है कि गंभीर अपराधों में सजा, सुधार और पुनर्वास के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। आज होने वाला फैसला इस बहुचर्चित प्रकरण में एक अहम अध्याय जोड़ सकता है।

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