हिसार के व्यक्ति द्वारा बौद्ध धर्म अपनाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, हरियाणा सरकार से जवाब तलब
हिसार के एक व्यक्ति द्वारा आरक्षण का लाभ लेने के लिए बौद्ध धर्म अपनाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इस मामले पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की टिप्पणी ने इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया। CJI ने कहा कि यह मामला “नए तरह के फ्रॉड” जैसा प्रतीत होता है, जिस पर गहन विचार की आवश्यकता है।
जानकारी के अनुसार, याचिका में आरोप लगाया गया है कि संबंधित व्यक्ति ने अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ उठाने के उद्देश्य से धर्म परिवर्तन किया। याचिकाकर्ता का कहना है कि संविधान के तहत आरक्षण का लाभ केवल उन्हीं समुदायों को मिलना चाहिए, जिनका सामाजिक और ऐतिहासिक रूप से शोषण हुआ है, न कि ऐसे मामलों में जहां केवल लाभ के लिए धर्म बदला जाए।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। यदि इस तरह के मामलों को बिना जांच के स्वीकार किया गया, तो आरक्षण प्रणाली की मूल भावना पर सवाल खड़े हो सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है।
हरियाणा सरकार से यह भी पूछा गया है कि राज्य में धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण से जुड़े मामलों को लेकर क्या स्पष्ट नीति या दिशा-निर्देश मौजूद हैं। अदालत ने संकेत दिए कि इस मुद्दे पर संतुलित और संवैधानिक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, ताकि न तो किसी के अधिकारों का हनन हो और न ही व्यवस्था का दुरुपयोग हो।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर बन सकती है। यह मामला यह तय कर सकता है कि धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण का दावा किस हद तक वैध माना जाएगा।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय करते हुए हरियाणा सरकार से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। इस प्रकरण पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर आरक्षण नीति और सामाजिक न्याय से जुड़े बड़े सवालों पर पड़ सकता है।
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