सफीदों अग्निकांड

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Safidon fire tragedy

रात्रि में पीड़ित परिवारों से मिलने घर-घर पहुंचे डिप्टी स्पीकर

पीड़ित परिवारों को दिए सरकार की ओर से सहायता चेक

सफीदों, (एस• के• मित्तल) : नगर की गीता कॉलोनी में हुए दर्दनाक फैक्ट्री अग्निकांड के बाद पीड़ित परिवारों को राहत देने के प्रयासों के बीच जहां प्रशासन और स्थानीय नेता नाकामयाब हुए, वहीं हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर एवं जींद के विधायक कृष्ण मिड्डा ने व्यक्तिगत स्तर पर पहल कर पीड़ित परिवारों तक पहुंचकर उन्हें सहायता राशि प्रदान की और वे पीड़ित परिवारों को मनाने में सफल रहे। बुधवार देर रात कृष्ण मिड्डा स्वयं पीड़ित परिवारों के घर-घर पहुंचे और मृतक महिलाओं के परिजनों को सरकार की ओर से 5-5 लाख रुपये के चेक वितरित किए। उन्होंने रात करीब 1 बजे तक यह प्रक्रिया जारी रखी। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी ओर से प्रत्येक मृतक के परिवार को 1-1 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये देने की भी घोषणा की। डिप्टी स्पीकर ने परिवारों से मुलाकात कर गहरा शोक व्यक्त किया और भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है। उन्होंने पीड़ितों से आग्रह किया कि वे सहायता राशि स्वीकार करें और किसी भी प्रकार की मदद के लिए वे स्वयं भी तत्पर रहेंगे। गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले नगर के रेस्ट हाउस में प्रशासन द्वारा चेक वितरण का प्रयास किया गया था, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। जिला उपायुक्त मोहम्मद इमरान रजा की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम में सफीदों के विधायक रामकुमार गौतम सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को रेस्ट हाउस में बुलाया था, जिससे नाराजगी देखने को मिली। लंबी बातचीत के बाद भी पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने चेक लेने से इनकार कर दिया। इस दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया था। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ सख्त धाराएं नहीं लगाई, जिसके चलते आरोपी आसानी से जमानत पर बाहर आ गए। उन्होंने आरोपियों को कड़ी सजा देने, मुआवजा राशी बढ़ाने व पीडि़त परिवारों को सरकारी नौकरी देने की मांग की थी। पीड़ित परिवारों ने यह भी स्पष्ट किया था कि उन्हें प्रशासन पर भरोसा नहीं है और वे सीधे मुख्यमंत्री से मिलकर न्याय की मांग करेंगे। साथ ही, उन्होंने स्थानीय विधायक के रवैये पर भी सवाल उठाए थे। उल्लेखनीय है कि 7 मार्च को सफीदों की एक फैक्ट्री में लगी भीषण आग में 16 महिलाएं काम कर रही थीं। इनमें से 12 महिलाओं की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि एक महिला अभी भी रोहतक पीजीआई में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है।

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