सफीदों, (एस• के• मित्तल) : सफीदों में ऐतिहासिक नागक्षेत्र के पास बनाए गए शहीद स्मारक से उद्घाटन पत्थर पिछले करीब 15 दिनों से गायब होने को लेकर शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह स्मारक 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के अवसर पर सफीदों के विधायक रामकुमार गौतम द्वारा उद्घाटित किया गया था।
स्मारक का निर्माण क्षेत्र के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसे सफीदों का पहला शहीद स्मारक बताया जा रहा है। इस स्मारक में महान क्रांतिकारियों शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जिससे यह स्थान देशभक्ति और सम्मान का प्रतीक बन गया है। हालांकि उद्घाटन के कुछ दिनों बाद ही स्मारक पर लगाया गया शिलान्यास पत्थर हट जाने से लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठने लगे।
स्थानीय नागरिकों में चर्चा है कि आखिर उद्घाटन का पत्थर कैसे गायब हो गया। मामले को लेकर जब नगरपालिका से जानकारी ली गई तो पालिका सचिव आशिष कुमार ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि 26 जनवरी को स्मारक के उद्घाटन के समय विधायक के नाम का पत्थर लगाया गया था, लेकिन उस पर उकेरे गए शब्द एक समान नहीं थे और लेखन में त्रुटियां पाई गई थीं। इसी कारण पत्थर को अस्थायी रूप से हटवाकर उसमें सुधार करवाया जा रहा है। सचिव के अनुसार, शब्दों को ठीक कर एक समान रूप देने के बाद दो से तीन दिनों के भीतर पत्थर को पुनः स्मारक स्थल पर स्थापित कर दिया जाएगा।
स्मारक का निर्माण क्षेत्र के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसे सफीदों का पहला शहीद स्मारक बताया जा रहा है। इस स्मारक में महान क्रांतिकारियों शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जिससे यह स्थान देशभक्ति और सम्मान का प्रतीक बन गया है। हालांकि उद्घाटन के कुछ दिनों बाद ही स्मारक पर लगाया गया शिलान्यास पत्थर हट जाने से लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठने लगे।
स्थानीय नागरिकों में चर्चा है कि आखिर उद्घाटन का पत्थर कैसे गायब हो गया। मामले को लेकर जब नगरपालिका से जानकारी ली गई तो पालिका सचिव आशिष कुमार ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि 26 जनवरी को स्मारक के उद्घाटन के समय विधायक के नाम का पत्थर लगाया गया था, लेकिन उस पर उकेरे गए शब्द एक समान नहीं थे और लेखन में त्रुटियां पाई गई थीं। इसी कारण पत्थर को अस्थायी रूप से हटवाकर उसमें सुधार करवाया जा रहा है। सचिव के अनुसार, शब्दों को ठीक कर एक समान रूप देने के बाद दो से तीन दिनों के भीतर पत्थर को पुनः स्मारक स्थल पर स्थापित कर दिया जाएगा। ![]()











