संजय मयूख ने शराब से हुई मौतों में मुआवजे के लिये बाल संरक्षण आयोग का दरवाजा खटखटाया

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पटना : छपरा में जहरीली शराब से हुई मौत के बाद परिजनों को मुआवजे दिये जाने की मांग को लेकर भाजपा लगातार नीतीश  सरकार पर दबाव बना रही है। लेकिन सरकार ने मुआवजे देने से मना कर दिया है। इसी क्रम में भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सलाहकार और विधान पार्षद डॉ संजय मयूख ने शुक्रवार को राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग को एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आयोग से छपरा शराब कांड के पीड़ितों के बच्चों के भरण-पोषण के लिए बिहार सरकार से मुआवजा जारी कराने की मांग की है। उन्होंने आयोग को बताया है कि बिहार के छपरा, सीवान, गोपालगंज और बेगूसराय में हाल ही में हुए जहरीली शराब कांड में लगभग 75 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई है, जबकि मीडिया में सामने आये आंकड़ों के अनुसार मरने वाले लोगों की संख्या 100 से अधिक है। जिसमें सबसे अधिक मृत्यु छपरा जिले के मशरक इलाके में हुई है, जहां जहरीली शराब के कारण लगभग 70 से अधिक लोगों की मौत हुई है। गांवों में तो कई ऐसे परिवार है जहां या तो अब सिर्फ महिलाएं बची हैं या कोई बच्चा। दर्जनों ऐसे परिवार हैं जिनके घरों में दुधमुंहा बच्चे हैं और उनके सर से कमाने वाले पिता का साया उठ गया है। संजय मयूख ने आगे बताया है कि इस जहरीली शराब कांड में कई बच्चे अनाथ और असहाय हो गए हैं। ये अधिकतर दिहाड़ी मजदूरी वाले परिवार हैं। ऐसे में इन बच्चों के जीवन पर भी संकट आन पड़ा है। इनके लिए दो वक्त भोजन जुटाना भी एक बड़ी समस्या बन गई है। इस स्थिति में बिहार की राज्य सरकार ने भी ऐसे बच्चों से मुंह मोड़ लिया है और इन्हें मरने के लिए छोड़ दिया है। इन गांवों में स्थिति काफी भयावह होती जा रही है। उन्होंने राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग से अनुरोध किया कि वह बिहार सरकार को ऐसे बच्चों के भरण-पोषण के लिए इन परिवारों को तत्काल मुआवजा उपलब्ध कराने के निर्देश दे ताकि असहाय हो चुके ये बच्चे जीवन से संघर्ष कर आगे बढ़ सके। गौरतलब है कि जहरीली शराब कांड की जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) भी कर रही है। इससे पहले मानवाधिकार आयोग ने डीजीपी, मुख्य सचिव को पहले ही नोटिस भेज चुका है। एनएचआरसी की जांच को लेकर बिहार में सियासत भी खूब हो रही है। इसको लेकर बिहार सरकार केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोल रही है। सरकार का कहना है कि भाजपा शासित कई राज्यों में भी जहरीली शराब से लोगों की मौत हुई है। वहां राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम क्यों नहीं जाती है?

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