केवल कक्षा तक ही सीमित न रहे पढ़ाई : डॉ अरुण उरांव

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रांची : पढ़ाई केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। शिक्षकों को बच्चों को जिनमें उनकी रूचि है वैसे संस्थानों का भ्रमण कराना चाहिए। केवल स्कूल की भव्य बिल्डिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर होना ही पर्याप्त नहीं है, शिक्षकों के लिए अपने ज्ञान का स्तर बढ़ाना भी जरूरी है तभी वे विद्यार्थियों पर प्रभाव छोड़ पायेंगे और उनकी समाज में भी अपनी एक अलग पहचान बनेगी। गुरूवार को ये बातें सीसीएल के स्वतंत्र निदेशक डॉ अरुण उरांव ने कहीं। वे सेवन स्टार एकेडमी में आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों के पहले गुरू होते हैं, उनकी आकांक्षाओं को यथार्थ के धरातल पर उतारने में जब शिक्षक समर्थ बनेंगे तभी उनकी सार्थकता है। उन्होंने कहा कि जब मैं गांव का भ्रमण करता हूं और वहां के बच्चों से पूछता हूं कि वे क्या बनेंगे तो उनमें से अधिकांश का जवाब होता है कि वे बड़े होकर आर्मी में जाना या शिक्षक बनना पसंद करेंगे। वहीं शहर हो या गांव कई बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर या वकील बनना चाहते हैं ऐसे बच्चों की अभिरुचि के अनुसार उन्हें बड़े अस्पताल, इंजीनियरिंग संस्थान और लॉ कॉलेज तथा यूनिवर्सिटी का भ्रमण उन्हें कराना चाहिए। कक्षाओं के अलावा प्रकृति भी एक बड़ी शिक्षक है और उनसे भी बच्चे सीख सकते हैं ऐसे में शिक्षकों को बच्चों की प्रकृति समझकर उसके विकास में मदद करनी चाहिए।

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