सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: जिन्हें बैट पकड़ना नहीं आता, वे क्रिकेट संघों में; खेल की पहचान सिर्फ खिलाड़ियों से

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Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने क्रिकेट संघों में गैर-खिलाड़ियों की भूमिका को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि जिन लोगों को बैट पकड़ना तक नहीं आता, वे क्रिकेट संघों का संचालन कर रहे हैं, जबकि किसी भी खेल की असली पहचान उसके खिलाड़ियों से होती है, न कि प्रशासकों से।

यह टिप्पणी महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए) के चुनाव से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आई। कोर्ट ने एसोसिएशन के चुनाव पर लगी रोक हटाने से इनकार कर दिया और स्पष्ट किया कि खेल संस्थाओं में पारदर्शिता और खेल भावना बनाए रखना बेहद जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि खेल संघों का उद्देश्य खिलाड़ियों के हितों की रक्षा और खेल के विकास पर होना चाहिए, न कि सत्ता और पद की राजनीति पर। अदालत के इस रुख को भारतीय खेल प्रशासन में सुधार की दिशा में एक अहम संदेश माना जा रहा है।

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