डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ेंगे कारीगर, ऑनलाइन बिक्री की मिलेगी सुविधा; मेला अवधि बढ़ाने पर मंथन
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले को जल्द ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़े जाने की तैयारी है। इस पहल का उद्देश्य देश-विदेश के कारीगरों को सालभर अपने हस्तशिल्प उत्पाद बेचने का अवसर देना है। अब सूरजकुंड मेला केवल कुछ दिनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऑनलाइन माध्यम से पूरे वर्ष सक्रिय रह सकेगा। इससे कारीगरों की आमदनी बढ़ाने और पारंपरिक कला को वैश्विक पहचान दिलाने में मदद मिलेगी।
प्रस्तावित योजना के तहत सूरजकुंड मेले के नाम से एक डिजिटल पोर्टल और मोबाइल एप विकसित किया जाएगा। इस प्लेटफॉर्म पर मेले में भाग लेने वाले कारीगर अपने उत्पाद अपलोड कर सकेंगे, जिन्हें देश और विदेश के ग्राहक ऑनलाइन खरीद सकेंगे। सरकार और पर्यटन विभाग का मानना है कि इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और कारीगरों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिलेगा।
इसके साथ ही सूरजकुंड मेले की अवधि को भी बढ़ाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। अभी तक यह मेला लगभग दो सप्ताह तक आयोजित होता है, लेकिन अब इसे चार सप्ताह तक करने का प्रस्ताव चर्चा में है। अधिकारियों का कहना है कि लंबी अवधि होने से अधिक कारीगरों और राज्यों को भागीदारी का मौका मिलेगा, वहीं पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने के बाद सूरजकुंड मेला केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि एक स्थायी मार्केटप्लेस के रूप में उभरेगा। इससे ग्रामीण और पारंपरिक कारीगरों को आर्थिक संबल मिलेगा और उनकी कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकेगा।
पर्यटन विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस योजना पर तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर काम शुरू हो चुका है। आने वाले समय में कारीगरों को डिजिटल प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे ऑनलाइन बिक्री की प्रक्रिया को आसानी से समझ सकें।
यदि यह योजना लागू होती है, तो सूरजकुंड मेला भारत के हस्तशिल्प क्षेत्र में एक नई मिसाल बन सकता है और ‘लोकल से ग्लोबल’ की सोच को मजबूती मिलेगी।
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