भगवद् गीता में है जीवन की हर मुश्किल का समाधान: स्वामी ज्ञानानंद

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Swami Gyananand Maharaj
श्रद्धालुओं को सम्मानित करते हुए स्वामी ज्ञानानंद महाराज।

श्रीकृष्ण भक्ति में जमकर झूमे श्रद्धालु

सफीदों, (एस• के• मित्तल) : नगर के सिटी पार्क में कृष्ण कृपा परिवार के तत्वावधान में आयोजित दिव्य गीता सत्संग में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि गीता जी में कहीं भी संकीर्णता व मत-मतांतर की बात नहीं कही गई है। गीता में सभी प्राणियों के हित की बात कही गई है। सही मानो तो गीता प्रेम, सद्भावना व सामाजिक समरसता की एक बुनियाद स्थापित करने वाला ग्रंथ है। गीता उपदेश 5160 वर्ष पूर्व कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में कौरवों व पांडवों के बीच चले युद्ध में युद्धभूमि पर दिया गया। गीता केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व का गौरव है और पूरी दुनिया के लोग गीता जी को आत्मसात करते हैं। भागवत गीता जी शांति का महत्वपूर्ण स्त्रोत है। उन्होंने कहा कि भगवद् गीता अपने आप में जीवन की हर मुश्किलों के समाधान का ग्रंथ है। महाभारत के युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने शोकग्रस्त व निराश अर्जुन को कहा था कि प्रभु मैं आपकी शरण में हूं और आपका शिष्य हुं, मुझे उचित मार्ग व ज्ञान प्रदान करें। गीता मनीषी ने कहा कि जब तक जीव अपने अहम् में रहता है, प्रभु उसका उद्धार नहीं करते। जब वह निराश होकर प्रभु को पुकारता है तो प्रभु उसकी पुकार अवश्य सुनते हैं। उन्होंने बताया कि गीता मनुष्य को ज्ञान भी देती है, कर्म का अर्थ भी समझाती है और भक्ति की सरिता में रसभोर भी करती है। गीता जो मानव जीवन सफल ही नहीं बनाती अपितु जीवन की चुनौतियों से लड़ने का साहस भी देती है। वास्तव में गीता वह है जो प्रत्येक मनुष्य को जीवन सही मायनों में जीने की शिक्षा देती है। पुराणों के अनुसार जिस घर में नियमित रूप से गीता का पाठ होता है वहां सुख-समृद्धि, यश-वैभव, ज्ञान, सतकर्म और धर्म अपने आप ही आ जाते हंै। गीता के बारे में अक्सर ये कहा जा सकता है कि गीता में मनुष्य को अपने हर सवालों के जवाब मिल जाते है। समारोह में भजनों की धून पर श्रद्धालु जमकर थिरके। वहीं स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने अनेक गण्यमान्य लोगों को अपने हाथों से सम्मानित किया।

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