स्वामी श्रद्धानंद का जीवन राष्ट्रोत्थान के लिए प्रेरणास्रोत: अरविंद शर्मा

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Swami Shraddhanand Saraswati
विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष अरविंद शर्मा।

बोले—वे संत ही नहीं, समाज-सुधार के निर्भीक प्रहरी थे

सफीदों, (एस• के• मित्तल) : विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष अरविंद शर्मा ने स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती के बलिदान दिवस के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वराज और स्वसंस्कृति के महान साधक स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रोत्थान और मानव मर्यादा की पुनर्स्थापना के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद केवल एक संत नहीं, बल्कि समाज-सुधार के निर्भीक प्रहरी थे, जिन्होंने सामाजिक कुरीतियों, छुआछूत, अज्ञान और रूढ़ियों के विरुद्ध आजीवन संघर्ष किया। अरविंद शर्मा ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद का संघर्ष साहस, करुणा और वैचारिक दृढ़ता का अद्भुत उदाहरण है। ऐसे समय में जब समाज अनेक कुप्रथाओं से जकड़ा हुआ था, उन्होंने निर्भीक होकर समानता और सामाजिक समरसता की आवाज बुलंद की। नारी शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और समान अधिकारों के क्षेत्र में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा है। उन्होंने महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने को राष्ट्र निर्माण की अनिवार्य शर्त बताया। उन्होंने आगे कहा कि स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के प्रबल पक्षधर थे। उनका मानना था कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति, शिक्षा और नैतिक मूल्यों में निहित है। इसी सोच के साथ उन्होंने गुरुकुल कांगड़ी जैसे शिक्षण संस्थानों के माध्यम से भारतीय शिक्षा पद्धति को सुदृढ़ करने का कार्य किया। अरविंद शर्मा ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद का बलिदान हमें आत्मसम्मान, सामाजिक समरसता और प्रगतिशील चेतना के मार्ग पर निरंतर अग्रसर रहने की प्रेरणा देता है। स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हुए यह संकल्प लेना चाहिए कि हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें और एक समरस, सशक्त एवं संस्कारित समाज के निर्माण में योगदान दें।

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