बेहद खास था अंग्रेजी शासन में भारत के लिए जारी किया गया दस हजार रुपये का चार सीरियल नंबर वाला नोट

Desk Editor
Desk Editor 5 Min Read

दयानंद राय

रांची। देश में नोटों का चलन जितना पुराना है, उतनी ही दिलचस्प इनसे जुड़ी कहानियां हैं। उन्हीं नोटों में से एक दस हजार रुपये के नोट की कहानी सुना रहा हूं। यह नोट बेहद खास था। भारत जब अंग्रेजी शासन के अधीन था तब यहां विभिन्न मूल्य वर्गों के अलावा दस हजार रुपये के नोट भी जारी किये गये थे। देश में तब 1899 से लेकर 1930 के बीच दस हजार रुपये का एक ऐसा नोट जारी किया गया था जो अपनी किस्म का इकलौता था। इस नोट की खासियत ये थी कि इसमें चार सीरियल नंबर हुआ करते थे। इस नोट के अलावा अन्य किसी नोट पर चार सीरियल नंबर अब तक मुद्रित नहीं किये गये हैं। इस नोट पर एएफ कॉक्स, सीरिल गेदर और एच डेनिंग के सिग्नेचर हुआ करते थे।एएफ कॉक्स के सिग्नेचर से जो नोट जारी किये गये उनका प्रीफिक्स एलए और सीरिल गेदर के सिग्नेचर से जारी किये गये नोट का प्रीफिक्स आरडी था। इसी तरह एच डेनिंग के सिग्नेचर से जारी किये गये नोट का प्रीफिक्स आरडी और आरई था। हालांकि, यह नोट आम जनता के लिए नहीं था और इसका इस्तेमाल भारत में संचालित बैंक रिजर्व कैश के लिए करते थे। यानि यह लोगों के लिए अप्राप्य था।

यूनिफेस था दस हजार रुपये का यह नोट

ब्रिटिश शासनकाल में निकला दस हजार रुपये का यह नोट यूनिफेस था, यानि इसके सिर्फ एक साइड छपाई होती थी और दूसरी साइड यह कोरा होता था।जिस समय यह नोट निकला था उस समय ब्रिटेन में महारानी विक्टोरिया का शासन था। ग्रीन अंडर प्रिंट और चार सीरियल नंबर के साथ जारी किया गया यह नोट 12 जनवरी 1946 को चलन से बाहर कर दिया गया। इस नोट की छपाई इंग्लैंड में होती थी और वहां से इसे कलकत्ता, कानपुर, लखनऊ, बांबे, कराची, मद्रास और रंगून सर्किल के लिए जारी किया जाता था। गौरतलब है कि तब बर्मा और पाकिस्तान भी भारत के ही हिस्से थे। इसलिए रंगून और कराची के लिए भी नोट जारी किये जाते थे।इस नोट के लिए कागज हैंडमेड होता था। दस हजार रुपये का एक दूसरा नोट 3 फरवरी 1931 को जारी किया गया था। इसमें जार्ज पंचम की तस्वीर लगी होती थी। इस नोट पर जेबी टेलर और जेडब्ल्यू केली के सिग्नेचर होते थे। नासिक प्रेस से छपा यह नोट 12 जनवरी 1946 को चलन से बाहर कर दिया गया। इस नोट में सिर्फ एक सीरियल नंबर था। दस हजार रुपये का एक नोट बैंक ऑफ बंगाल ने भी जारी किया था। पर यह दस हजार सिक्का रुपये का नोट था। वहीं, एक नोट बैंक ऑफ बांबे ने जारी किया था जो स्पेशिमेन नोट था।

बर्मा के लिए भी जारी किया गया था दस हजार का नोट

अंग्रेजी शासनकाल में दस हजार रुपये का एक नोट बर्मा के लिए मई 1939 में जारी किया गया था। इस समय ब्रिटेन में जार्ज छठवें का शासन था। इसमें जार्ज सिक्स की पोट्रेट तस्वीर लगी रहती थी।यह नोट एक मई 1945 को डिमोनिटाइज्ड यानि चलन से बाहर कर दिया गया।

आजाद भारत में भी निकला था दस हजार का नोट

दस हजार रुपये का एक नोट आजाद भारत में भी निकला था। इस नोट को पहली बार 11 अप्रैल 1954 में जारी किया गया था और 16 जनवरी 1978 को यह चलन से बाहर कर दिया गया था। यह कलकत्ता, मद्रास, बांबे, कानपुर और दिल्ली सर्किल के लिए जारी किया गया था।इसपर आरबीआई के तत्कालीन गवर्नर बी रामाराव, एचवीआर अयंगर और एलके झा के हस्ताक्षर हुआ करते थे।एलके झा के सिग्नेचर से इस नोट का सिर्फ स्पेशिमेन इशु जारी किया गया था। इस नोट में भी सिर्फ एक सीरियल नंबर हुआ करता था।

Share This Article
Leave a comment