रामचरितमानस के खिलाफ बोलने वाले को सजा मिलनी चाहिए : महेश्वर सिंह

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पटना :  महाराणा प्रताप की स्मृति में सोमवार को यहां आयोजित राष्ट्रीय स्वाभिमान दिवस के मौके पर जमकर सियासी तीर छोडे गये। इस मौके पर सभा को संबोधित करते हुए विधान पार्षद महेश्वर सिंह ने शिक्षा मंत्री डॉ चंद्रशेखर की ओर से रामचरितमानस को लेकर दिए गए विवादित बयान पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कुछ लोग हमारी संख्या की गिनती करवाते हैं। अब तो अति हो गया है कि रामचरितमानस पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है। जो लोग इसको लेकर कुछ बोल रहे हैं वो हिजड़े हैं।उन्होंने कहा कि जिनको रामचरितमानस को लेकर कुछ भी जानकारी नहीं है, वो इसको लेकर बयानबाजी कर रहे हैं। उनको पहले यह मालूम होना चाहिए कि रामचरितमानस हमें क्या सीख देती है? महेश्वर सिंह ने कहा कि रामचरितमानस हमें यह बतलाता है कि क्षत्रिय धर्म क्या है और माता-पिता के बीच हमारा संबंध किस तरह का होना चाहिए? भाई से हमारा नाता कैसा होना चाहिए? इससे हम सीखते हैं कि गुरु और शिष्य का नाता किस तरह का होना चाहिए? यह हमें संस्कार सिखाता हैं न की बड़बोलापन सिखाता है। इसलिए मानस पर बोलने वाले लोग अनपढ़ हैं। उनको इसकी सजा मिलनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने इशारों ही इशारों में मंत्री अलोक मेहता को भी संदेश देते हुए कह किे हम सभी जाति का सपोर्ट करने वाले लोग हैं। हम किसी के ऊपर भी विवादित बयान नहीं देते हैं। हमलोग कभी भी जात-पात नहीं करते हैं। अगर हमलोग जात-पात करते तो भगवान राम सबरी के जूठे बैर नहीं खाते। भगवान राम जब युद्ध लड़ने गए तो वनवासी ने उनका समर्थन किया। बता दें कि बिहार के शिक्षा मंत्री ने कहा था कि रामचरितमानस नफरत फैलाने वाला ग्रंथ है। यह समाज को दो भागों में बांटने का काम करता है। इसके बाद बिहार में काफी विवाद हुआ और अभी यह विवाद शांत भी नहीं हुआ था कि अब मंत्री आलोक मेहता ने सवर्णों को ले कर विवादित बयान दे डाला है।

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