जब नीतीश और ललन सिंह कहीं नहीं थे तब से मैं साहब था : आरसीपी सिंह

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पटना : भाजपा में शामिल होने के बाद प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में भाग लेने पहुंचे पूर्व केन्द्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने शनिवार को  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बखिया उधेड़ दी।  मुख्यमंत्री के कभी बहुत करीबी रहे आरसीपी सिंह ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुये कहा कि मैं कभी नीतीश कुमार का सेवक नहीं रहा। मैं तो 1982 से साहब था। जब नीतीश और ललन सिंह कहीं नहीं थे तब से मैं साहब था। उन्होंने नीतीश-ललन को चुनौती देते हुए कहा कि हमसे निपटने की औकात नहीं और चले हैं हमारी बेटियों से निपटने। आज मेरी बेटियों को परेशान किया जा रहा है।

मैं उनको साहब क्यों कहूंगा जी?

उन्होंने नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि मैं उनको साहब क्यों कहूंगा जी? मैं साहब तो पहले से था, मैं उनका कोई सब ऑरडिनेट हूं क्या? जिस समय में साहब था, उसम समय वो साहब नहीं थे। यह उस समय की बात है, जब मैं उनके साथ था, उनके साथ काम करता था। आरसीपी सिंह से पूछा गया था कि नीतीश कुमार कहते हैं कि वे उन्हें राजनीति में लाए। यह सवाल सुनकर आरसीपी सिंह ने कहा कि अच्छा..अच्छा सुन लीजिए, वो क्या लायेंगे, उनको कौन लाया था, पैदा लिए थे तो राजनीति में आ गए थे क्या? आप (नीतीश) 1977 में चुनाव लड़े, 1980 में लड़े क्या हुआ? किसको सिखा रहे हैं। हमसे ये सब चर्चा न करें। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार और उनके लोग सिर्फ जुबानी बयानबाजी कर सकते हैं। उनमें दम नहीं है। वे मेरे खिलाफ सिर्फ ओछी बयानबाजी कर सकते हैं। आने वाले चुनाव में उन्हें अपनी हैसियत का अंदाजा हो जायेगा।

आरोप में दम है तो मेरे खिलाफ कार्रवाई करें

यह पूछे जाने पर कि ललन सिंह आरसीपी टैक्स की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं जीवन में सिर्फ एक बार मंत्री बना हूं। वह भी केंद्र में इस्पात मंत्री। पूरे देश में पता कर लीजिये, मैंने किसी का एक कप चाय भी पिया हो। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं, ललन सिंह उनकी सरकार में मंत्री रहे और टैक्स मैं वसूलूंगा? जो टैक्स वसूल रहे हैं, उनकी हकीकत सब जानते हैं। मुख्यमंत्री ये लोग रहे। मंत्री ये लोग रहे और टैक्स हम वसूल रहे हैं? वाह क्या तरीका है। उन्होंने कहा कि उन लोगों ने आरोप लगाया था कि मैंने जमीन खरीदी है। मैंने जवाब दे दिया था। अगर उनके आरोप में कोई दम होता तो मेरे खिलाफ कार्रवाई करें। मेरे खिलाफ कुछ करने की हैसियत नहीं है उनलोगों की। देखिए जितनी घटिया सोच है। एक बात मैं बता दूं, हमसे निबटने की औकात नहीं है।

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