डिजिटल जाल से अपराध की भर्ती, नाबालिगों का खतरनाक इस्तेमाल

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Yamunanagar Crime

सोशल मीडिया के जरिए संपर्क, पैसों के लालच में फायरिंग की घटनाओं को दिया अंजाम

यमुनानगर में सामने आए एक गंभीर आपराधिक मामले ने कानून व्यवस्था और सामाजिक जिम्मेदारी दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां बेहद कम उम्र के बच्चों को पैसों का लालच देकर संगठित अपराध का हिस्सा बनाया गया। पुलिस जांच में सामने आया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपर्क कर मासूमों को आपराधिक गतिविधियों में शामिल किया गया और उन्हें फायरिंग जैसी खतरनाक वारदातों के लिए उकसाया गया।

जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने करीब पचास हजार रुपये का प्रलोभन देकर नाबालिगों को “शूटर” के रूप में इस्तेमाल किया। इस नेटवर्क के जरिए शहर के व्यस्त इलाकों में दहशत फैलाने की साजिश रची गई। सिटी मॉल और एक अस्पताल परिसर के पास हुई फायरिंग की घटनाओं ने आम लोगों में भय का माहौल बना दिया। गनीमत रही कि इन घटनाओं में कोई जानमाल का बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि अपराधियों ने युवाओं की सोशल मीडिया सक्रियता को निशाना बनाया। पहले ऑनलाइन बातचीत के जरिए भरोसा जीता गया, फिर धीरे-धीरे उन्हें अपराध की दुनिया में धकेल दिया गया। इस पूरे नेटवर्क को पेशेवर तरीके से संचालित किया जा रहा था, जिसमें मुख्य आरोपी पर्दे के पीछे रहकर निर्देश दे रहे थे।

मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई अहम सुराग जुटाए हैं और नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है। नाबालिगों की भूमिका को देखते हुए पुलिस और बाल संरक्षण इकाइयां भी सक्रिय हो गई हैं, ताकि बच्चों को सुधार और परामर्श के जरिए मुख्यधारा में लाया जा सके।

पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें और किसी भी संदिग्ध व्यवहार की जानकारी तुरंत साझा करें। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता भी बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में मासूमों को अपराध के रास्ते पर जाने से रोका जा सके।

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