आलू उत्पादकों पर बाजार की मार, हरियाणा में समर्थन की उठी जोरदार आवाज

53
Bhavantar scheme

कुरुक्षेत्र से मुख्यमंत्री तक पहुंची किसानों की पीड़ा, नुकसान की भरपाई की मांग तेज

हरियाणा में आलू की कीमतों में आई भारी गिरावट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर कुरुक्षेत्र और आसपास के इलाकों में किसान लागत भी निकाल पाने की स्थिति में नहीं हैं। बाजार में आलू के भाव इतने नीचे चले गए हैं कि किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

इस मुद्दे को लेकर भारतीय किसान यूनियन (BKU) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर किसानों की समस्याओं से अवगत कराया है। पत्र में उन्होंने कहा है कि आलू की खेती पर प्रति एकड़ लागत लगातार बढ़ रही है, जिसमें बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी शामिल हैं, लेकिन मंडियों में मिलने वाला मूल्य इन खर्चों के मुकाबले बेहद कम है।

चढूनी ने पत्र के माध्यम से सरकार से मांग की है कि आलू को भावांतर भरपाई योजना के दायरे में शामिल किया जाए, ताकि किसानों को न्यूनतम मूल्य का लाभ मिल सके। उनका कहना है कि जब अन्य फसलों के लिए यह योजना लागू है, तो आलू उत्पादकों को इससे वंचित रखना उचित नहीं है। यदि समय रहते राहत नहीं दी गई, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

किसानों का कहना है कि कई जगहों पर आलू का भाव लागत से आधा भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में कर्ज का बोझ बढ़ने का खतरा बना हुआ है। कुछ किसान तो फसल को खेत में ही छोड़ने या बेहद कम दामों पर बेचने को मजबूर हो रहे हैं।

BKU अध्यक्ष ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो किसान आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार किसानों की स्थिति को समझते हुए जल्द सकारात्मक फैसला लेगी।

वहीं, प्रशासनिक स्तर पर भी आलू के दामों और बाजार स्थिति पर नजर रखी जा रही है। किसानों को अब सरकार के फैसले का इंतजार है, जिससे उन्हें राहत मिल सके।

Loading