सफीदों, (एस• के• मित्तल) : एसडीएम पुलकित मल्होत्रा ने क्षेत्र के किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेषों में आग लगाने से पूरी तरह परहेज करें। पराली या अन्य अवशेषों को जलाने से प्रदूषण में तेजी से बढ़ोतरी होती है, जिससे न केवल पर्यावरण को क्षति पहुंचती है बल्कि पशुओं के लिए चारे की भी भारी कमी उत्पन्न हो जाती है। यह समस्या केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश और देश के पर्यावरण को प्रभावित करती है। एसडीएम ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के माध्यम से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं। किसानों को चाहिए कि वे इन स्कीमों का लाभ उठाकर वैज्ञानिक व आधुनिक तरीके से अवशेषों का प्रबंध करें। सरकार द्वारा सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, रोटावेटर, जीरो टिल सीड ड्रिल, हैप्पी सीडर, श्रेडर और बेलर जैसी मशीनों पर अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि किसानों को आर्थिक बोझ न उठाना पड़े और फसल अवशेषों का उपयोग खाद या चारे के रूप में किया जा सके। एसडीएम ने कहा कि ग्राम सचिव और पटवारी प्रतिदिन गांवों के खेतों का दौरा करें और वहां मुनादी के माध्यम से किसानों को जागरूक करें। इसके साथ ही प्रत्येक ग्राम पंचायत में सरपंचों के माध्यम से इस विषय पर विशेष जागरूक किया जाए, ताकि किसान समझ सकें कि खेतों में आग लगाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति घटती है, लाभदायक जीवाणु मर जाते हैं और अगली फसल की उत्पादकता पर भी असर पड़ता है। एसडीएम ने निर्देश दिए कि बीडीओ, तहसीलदार और कृषि विभाग से एक-एक अधिकारी की संयुक्त टीम बनाकर क्षेत्र का नियमित निरीक्षण किया जाए। ये टीमें गांव व खेतों में जाकर किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की प्रक्रिया और इससे होने वाले दीर्घकालिक लाभों के बारे में जागरूक करें। ताकि उपमंडल में किसानों द्वारा आग लगाए जाने वाली घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि किसी किसान को पराली प्रबंधन में कठिनाई आती है तो संबंधित कृषि अधिकारी तत्परता से उसकी सहायता करें। एसडीएम पुलकित मल्होत्रा ने कहा कि यह सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जाए। फसल अवशेषों को जलाने से कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड और सूक्ष्म कणों का उत्सर्जन होता है जो मानव स्वास्थ्य, पशुओं, फसलों और मिट्टी के लिए हानिकारक होता है। इसके अलावा आग लगने की घटनाओं से खेतों की मेड़ें, पेड़-पौधे और आसपास के संकटग्रस्त क्षेत्र भी प्रभावित होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार प्रदूषण रोकने को लेकर गंभीर है और यदि कहीं भी पराली जलाने का मामला सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मगर प्रशासन का पहला उद्देश्य जागरूकता लाना और किसानों को सहयोग देना है।
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