राम रहीम पत्रकार छत्रपति हत्याकांड में बरी: हाईकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला, 7 साल पहले सुनाई गई थी उम्रकैद

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हरियाणा के चर्चित पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में बड़ा मोड़ आया है। गुरमीत राम रहीम सिंह को हाईकोर्ट ने इस मामले में बरी कर दिया है। करीब 7 साल पहले सीबीआई कोर्ट ने उन्हें इस मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

क्या है पूरा मामला

यह मामला साल 2002 का है। उस समय सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा से जुड़ी एक गुमनाम चिट्ठी प्रकाशित की थी। इस चिट्ठी में डेरा प्रमुख पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।

चिट्ठी प्रकाशित होने के कुछ समय बाद ही 24 अक्टूबर 2002 को अज्ञात हमलावरों ने पत्रकार छत्रपति को गोली मार दी। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन कुछ दिनों बाद उनकी मौत हो गई।

2019 में हुई थी उम्रकैद

लंबी जांच और सुनवाई के बाद साल 2019 में सीबीआई कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम सिंह और अन्य आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट का नया फैसला

अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर उनके खिलाफ आरोप साबित नहीं होते।

हालांकि इस मामले में शामिल तीन अन्य आरोपियों की सजा को बरकरार रखा गया है

पहले से जेल में हैं राम रहीम

गौरतलब है कि गुरमीत राम रहीम सिंह पहले से ही रेप केस में सजा काट रहे हैं। उन्हें सीबीआई की विशेष अदालत ने साध्वियों से यौन शोषण के मामले में दोषी ठहराते हुए 20 साल की सजा सुनाई थी।

मामले की अहमियत

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड को देश के सबसे चर्चित मामलों में से एक माना जाता है। इस मामले में आए नए फैसले के बाद एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया और सबूतों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

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