हरियाणा की राजनीति में एक बयान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जुलाना से विधायक मासूम शर्मा ने एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व सरपंच को अपना रिश्तेदार बताते हुए जो टिप्पणी की, उस पर विपक्ष और स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई। मामला तूल पकड़ता देख विधायक ने सफाई भी दी।
क्या है पूरा मामला?
एक पंचायत स्तर के कार्यक्रम में बोलते हुए मासूम शर्मा ने कहा कि “पूर्व सरपंच मेरे रिश्तेदार हैं।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत किसी एक व्यक्ति के कहने से नहीं चलती, बल्कि पूरे गांव की सहमति से निर्णय होते हैं।
उनके इस बयान के बाद कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि वह रिश्तेदारी के आधार पर पंचायत को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।
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उन्होंने आगे कहा कि पंचायत एक सामूहिक व्यवस्था है और गांव के विकास के फैसले मिलकर लिए जाते हैं। किसी एक व्यक्ति की बात से पंचायत संचालित नहीं होती।
विपक्ष का आरोप
विपक्षी नेताओं का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को सार्वजनिक मंच से बोलते समय शब्दों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उनका आरोप है कि इस तरह के बयान से पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
पंचायत की भूमिका क्या?
हरियाणा में पंचायतें स्थानीय शासन की सबसे अहम इकाई मानी जाती हैं। गांव के विकास, सड़क, पानी, बिजली और अन्य सुविधाओं से जुड़े फैसले पंचायत स्तर पर लिए जाते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की पक्षपात की आशंका पर विवाद खड़ा होना स्वाभाविक है।
आगे क्या?
फिलहाल विधायक ने बयान वापस लेने की बात कहकर विवाद शांत करने की कोशिश की है। अब देखना होगा कि यह मामला यहीं थमता है या राजनीतिक तकरार आगे भी जारी रहती है।
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