दो दशक बाद मिली राहत, 2006 से वरिष्ठता और समस्त सेवा लाभ देने के निर्देश
चंडीगढ़ स्थित केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने आयकर विभाग के आठ स्टेनोग्राफरों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि संबंधित कर्मचारियों को गलत तरीके से कनिष्ठ श्रेणी में रखा गया था, जबकि उनकी सेवा अवधि और नियमों के अनुसार उन्हें वरिष्ठता का लाभ मिलना चाहिए था।
मामला लगभग 20 वर्षों से लंबित था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि विभागीय पुनर्गठन और पदस्थापन के दौरान उन्हें अनुचित रूप से जूनियर घोषित कर दिया गया, जिससे पदोन्नति, वेतनमान और अन्य सेवा लाभ प्रभावित हुए। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अधिकरण ने दस्तावेजों और सेवा अभिलेखों का अवलोकन करते हुए फैसला कर्मचारियों के पक्ष में सुनाया।
आदेश में कहा गया है कि संबंधित कर्मियों को वर्ष 2006 से प्रभावी वरिष्ठता सूची में उचित स्थान दिया जाए। साथ ही, वेतन विसंगतियों को दूर करते हुए एरियर और अन्य वित्तीय लाभ भी प्रदान किए जाएं। ट्रिब्यूनल ने विभाग को निर्धारित समयसीमा में आदेश लागू करने के निर्देश दिए हैं।
कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया। उनका कहना है कि इस निर्णय से न केवल प्रभावित कर्मचारियों को राहत मिलेगी, बल्कि भविष्य में सेवा नियमों के पालन को लेकर भी स्पष्टता आएगी।
यह फैसला प्रशासनिक सेवा मामलों में पारदर्शिता और नियमसम्मत प्रक्रिया के महत्व को रेखांकित करता है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि विभाग आदेश को किस समयसीमा में लागू करता है।
![]()











