हिमाचल प्रदेश में आर्थिक स्थिति को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष Jai Ram Thakur ने दावा किया है कि प्रदेश की वित्तीय हालत इतनी कमजोर हो चुकी है कि विधायकों को वेतन देने तक के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचे हैं। उन्होंने यह बयान पंचकूला में मीडिया से बातचीत के दौरान दिया।
उन्होंने कहा कि राज्य लंबे समय से वित्तीय दबाव झेल रहा है और अब स्थिति गंभीर रूप ले चुकी है। उनके अनुसार, पूर्व में लिए गए फैसलों और योजनाओं का बोझ प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर लगातार बढ़ता गया, जिससे वर्तमान हालात बने हैं।
जयराम ठाकुर ने विशेष रूप से “6 CPH” (कॉन्ट्रैक्ट पॉलिसी हायरिंग) के बोझ का जिक्र करते हुए कहा कि इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। उनका कहना है कि इन व्यवस्थाओं को लंबे समय तक जारी रखने से वित्तीय संतुलन बिगड़ गया और अब सरकार के सामने भुगतान से जुड़े संकट खड़े हो गए हैं।
वहीं, सत्तापक्ष की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया भी सामने आने की संभावना है। सरकार का पक्ष यह हो सकता है कि आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और वित्तीय प्रबंधन को संतुलित करने की दिशा में काम जारी है।
इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों के हितों से जुड़ा हुआ है। आर्थिक स्थिति को लेकर उठ रहे सवाल आने वाले समय में और तेज हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस आर्थिक सुधार नहीं किए गए, तो इसका असर विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं पर भी पड़ सकता है। ऐसे में सरकार के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय माना जा रहा है।
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