यमुनानगर में किसानों के एक संगठन ने कृषि क्षेत्र से जुड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समझौते के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसान सड़कों पर उतरे और अपनी मांगों तथा चिंताओं को लेकर रोष मार्च निकाला। इस दौरान किसानों ने सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रस्तावित कृषि व्यापारिक व्यवस्था का असर देश के किसानों, कृषि बाजारों और स्थानीय उत्पादन प्रणाली पर पड़ सकता है। किसानों ने आशंका जताई कि यदि ऐसे समझौते बिना व्यापक चर्चा और किसानों की राय के लागू किए गए तो इसका प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खेती-किसानी पर पड़ सकता है।
रोष मार्च के दौरान किसानों ने विभिन्न नारों के माध्यम से अपनी मांगें रखीं और कृषि हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की। प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किया गया, जिसमें किसानों ने अपनी चिंताओं को विस्तार से रखा। संगठन के नेताओं ने कहा कि कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इससे जुड़े किसी भी बड़े निर्णय में किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
प्रदर्शन के बाद किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कृषि नीतियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समझौतों को लेकर अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराए गए। किसानों ने सरकार से इस विषय पर पुनर्विचार करने और सभी पक्षों के साथ व्यापक संवाद स्थापित करने की मांग की।
इस प्रदर्शन ने एक बार फिर कृषि नीति, वैश्विक व्यापार और किसानों के हितों को लेकर बहस को तेज कर दिया है। विभिन्न किसान संगठनों की नजर अब सरकार की आगामी प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। वहीं प्रशासन ने प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने की जानकारी देते हुए कहा कि ज्ञापन संबंधित स्तर तक पहुंचाया जाएगा।
फिलहाल इस मुद्दे को लेकर किसान संगठनों और सरकार के बीच संवाद की संभावनाओं पर सभी की नजर बनी हुई है।
![]()











