रेवाड़ी में हुए चर्चित मोनू हत्याकांड की जांच में पुलिस को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया है कि वारदात को अंजाम देने से पहले पीड़ित की गतिविधियों पर नजर रखी गई और मोबाइल लोकेशन के आधार पर उसकी मौजूदगी की जानकारी जुटाई गई। पुलिस का कहना है कि मामले की हर कड़ी को वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जोड़ा जा रहा है।
जांच के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि पारिवारिक और व्यक्तिगत संबंधों से जुड़े विवाद इस मामले का प्रमुख कारण हो सकते हैं। आरोप है कि पीड़ित की पत्नी और उसके परिचित के बीच कथित साजिश रची गई, जिसके बाद अन्य लोगों की मदद से वारदात को अंजाम दिया गया। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सभी आरोपों की पुष्टि साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है और जांच अभी जारी है।
अधिकारियों के अनुसार, मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन डेटा, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है। इन तकनीकी प्रमाणों के आधार पर घटनाक्रम की पूरी समय-रेखा तैयार की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वारदात से पहले और बाद में कौन-कौन लोग संपर्क में थे और उनकी भूमिका क्या रही।
पुलिस ने मामले में शामिल संदिग्धों से पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि घटना की योजना कब बनाई गई और इसमें कितने लोग शामिल थे। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुलिस सभी उपलब्ध साक्ष्यों को एकत्र कर मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है और पर्याप्त सबूत मिलने के बाद आरोपियों के खिलाफ मजबूत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि मामले से जुड़ी अपुष्ट जानकारी या अफवाहों पर भरोसा न करें।
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