हरियाणा के पंचकूला में दहेज उत्पीड़न से जुड़े एक मामले में पुलिस की कार्यशैली को लेकर विवाद गहरा गया है। शिकायतकर्ता महिला का आरोप है कि सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों की ओर से “यह पुरुष प्रधान देश है” जैसी टिप्पणी की गई। इसी मामले में कार्रवाई करते हुए संबंधित SHO और ASI को निलंबित कर दिया गया है।
पीड़िता का आरोप है कि उसके SI (सब-इंस्पेक्टर) ससुर ने 6 लाख रुपये लिए, लेकिन इसके बावजूद दर्ज की गई FIR में उनका नाम शामिल नहीं किया गया। महिला ने जांच में पक्षपात और लापरवाही का आरोप लगाते हुए उच्च अधिकारियों से शिकायत की थी। ये आरोप शिकायतकर्ता के हैं और मामले की जांच का विषय हैं।
मामले के सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने पूरे प्रकरण की समीक्षा की। प्रारंभिक स्तर पर जांच में कथित लापरवाही पाए जाने के बाद SHO और ASI के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया। साथ ही मामले की विस्तृत जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि दहेज उत्पीड़न और महिलाओं से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना पुलिस की जिम्मेदारी है। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल मामले की विभागीय जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों, शिकायतकर्ता के आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यकता पड़ने पर आगे की कानूनी और विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी। इस मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली और महिलाओं से जुड़े मामलों की जांच को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
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