मां बनने के बाद भी नहीं टूटा हौसला, हरियाणा की शोधार्थी ने कॉमनवेल्थ में जीता कांस्य पदक

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Commonwealth Games

हरियाणा की एक पीएचडी स्कॉलर ने कॉमनवेल्थ प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर राज्य और देश का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता केवल खेल उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, धैर्य और दृढ़ संकल्प की प्रेरणादायक कहानी भी है। खिलाड़ी ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उन्हें लगातार दो सीजन तक मैदान से दूर रहना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और वापसी करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक अपने नाम कर लिया।

खिलाड़ी ने बताया कि इस पूरे सफर में उनके पति ने कोच की भूमिका निभाई और हर कदम पर उनका साथ दिया। प्रशिक्षण से लेकर मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने तक, उन्होंने लगातार सहयोग किया। खिलाड़ी का कहना है कि परिवार के समर्थन ने मुश्किल दौर को आसान बना दिया और उन्हें अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखने में मदद मिली।

उन्होंने यह भी कहा कि उनका चार साल का बेटा उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा है। जब भी वह अभ्यास या प्रतियोगिता के लिए जाती हैं, तो बेटे की मुस्कान और प्रोत्साहन उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने का हौसला देता है। खिलाड़ी का मानना है कि परिवार का विश्वास किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ी ताकत होता है।

गर्भावस्था के कारण लंबे समय तक प्रतियोगिताओं से दूर रहने के बाद दोबारा फिटनेस हासिल करना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने कड़ी मेहनत, नियमित अभ्यास और अनुशासित दिनचर्या के दम पर शानदार वापसी की। उनकी यह उपलब्धि उन महिलाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाकर अपने सपनों को पूरा करना चाहती हैं।

कॉमनवेल्थ में कांस्य पदक जीतने के बाद खेल जगत और हरियाणा में खुशी का माहौल है। खिलाड़ियों, कोचों और खेल प्रेमियों ने उनकी इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए इसे राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया है।

इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति, परिवार का साथ और निरंतर मेहनत से हर चुनौती को पार किया जा सकता है। अब खिलाड़ी की नजर आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में और बेहतर प्रदर्शन कर देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने पर है।

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