हरियाणा की डिस्कस थ्रोअर ने मातृत्व के बाद शानदार वापसी करते हुए कॉमनवेल्थ प्रतियोगिता में पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। यह उपलब्धि केवल खेल जगत के लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो परिवार और अपने सपनों के बीच संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ना चाहती हैं। खिलाड़ी ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार, मेहनत और अपने चार वर्षीय बेटे के उत्साहवर्धन को दिया।
खिलाड़ी ने बताया कि मां बनने के बाद दोबारा मैदान पर लौटना आसान नहीं था। फिटनेस हासिल करने, नियमित अभ्यास करने और प्रतियोगी स्तर तक पहुंचने के लिए उन्हें लगातार मेहनत करनी पड़ी। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य पर पूरा ध्यान बनाए रखा।
उन्होंने कहा कि उनका चार वर्षीय बेटा उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा है। जब भी वह ट्रेनिंग करती हैं, बेटा उन्हें देखकर उत्साहित होता है और कहता है, “मां, वेरी गुड।” खिलाड़ी के अनुसार, बेटे के ये छोटे-छोटे शब्द उन्हें हर दिन नई ऊर्जा और आत्मविश्वास देते हैं। यही वजह है कि वह हर चुनौती का सामना मजबूती से कर पाती हैं।
इस सफर में परिवार का सहयोग भी उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने बताया कि परिवार के समर्थन और सकारात्मक माहौल ने उन्हें खेल में वापसी करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने का आत्मविश्वास दिया। लगातार अभ्यास और अनुशासन की बदौलत उन्होंने कॉमनवेल्थ में पदक जीतने का सपना साकार किया।
उनकी इस उपलब्धि पर खेल जगत, कोचों और खेल प्रेमियों ने खुशी जताई है। हरियाणा लंबे समय से देश को उत्कृष्ट खिलाड़ी देता रहा है और इस जीत ने एक बार फिर राज्य की खेल परंपरा को मजबूत किया है। उनकी सफलता से युवा खिलाड़ियों, विशेषकर महिला खिलाड़ियों को नई प्रेरणा मिली है।
अब खिलाड़ी की नजर आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर है। उनका लक्ष्य भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करते हुए देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। उन्होंने कहा कि मेहनत, आत्मविश्वास और परिवार का साथ किसी भी चुनौती को सफलता में बदल सकता है।
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