हिसार में सर्फ एक्सेल के पाउच में कम निकला पाउडर, कंपनी के खिलाफ FIR

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Hisar News

हिसार में पैक्ड डिटर्जेंट के एक पाउच में निर्धारित मात्रा से कम वजन मिलने का मामला सामने आया है। जांच के दौरान 70 ग्राम के सर्फ एक्सेल पाउच में सिर्फ 53 ग्राम पाउडर पाया गया। मामले में पंजाब की मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

जानकारी के अनुसार, संबंधित विभाग की ओर से सर्फ एक्सेल के पाउच की जांच की गई थी। पैकेट पर उत्पाद का वजन 70 ग्राम दर्ज था, लेकिन जब पाउच का वास्तविक वजन जांचा गया तो उसमें महज 53 ग्राम डिटर्जेंट मिला। इससे पैकेट पर घोषित और वास्तविक मात्रा में अंतर सामने आया।

मामले को उपभोक्ता अधिकारों और पैकेजिंग नियमों से जोड़कर देखा जा रहा है। किसी पैक्ड उत्पाद पर जितनी मात्रा अंकित होती है, उपभोक्ता को उसी के अनुरूप सामग्री मिलना जरूरी होता है। निर्धारित मात्रा से कम उत्पाद मिलने पर संबंधित कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

जांच के बाद अधिकारियों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पंजाब की संबंधित मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज की गई।

अधिकारियों की ओर से यह भी जांच की जा रही है कि कम वजन वाला पाउच किसी एक बैच में मिला है या फिर इस तरह की कमी अन्य पैकेटों में भी हो सकती है। इसके लिए संबंधित उत्पाद के बैच और निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है।

मामले में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पैकेट में निर्धारित मात्रा से 17 ग्राम कम डिटर्जेंट कैसे पहुंचा। क्या यह पैकिंग प्रक्रिया में कमी के कारण हुआ या किसी अन्य वजह से, इसकी जानकारी जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी।

यह मामला सामने आने के बाद पैक्ड सामान खरीदने वाले उपभोक्ताओं के बीच भी चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्राहकों को पैकेट पर लिखी मात्रा, MRP, निर्माण तिथि और अन्य जरूरी जानकारियों को ध्यान से देखना चाहिए।

कम वजन मिलने की स्थिति में उपभोक्ता संबंधित विभाग में शिकायत भी कर सकते हैं। ऐसे मामलों में जांच के आधार पर निर्माता या संबंधित जिम्मेदार पक्ष के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल पुलिस ने FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हिसार में सामने आया यह मामला पैक्ड उत्पादों में सही मात्रा सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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