हरियाणा के कैथल में 7 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में हाईकोर्ट ने दोषी की सजा को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दोषी को सुनाई गई फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। मामले में ₹73 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह मामला एक नाबालिग बच्ची से जुड़े गंभीर अपराध का था, जिसके बाद निचली अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही अदालत ने आर्थिक दंड भी लगाया था। बाद में मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में हुई, जहां दोषी की ओर से फांसी की सजा को चुनौती दी गई।
हाईकोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने का निर्णय लिया। अदालत के फैसले के बाद अब दोषी को फांसी नहीं दी जाएगी, बल्कि उसे आजीवन कारावास की सजा भुगतनी होगी।
मामले में ₹73 लाख के जुर्माने का भी उल्लेख है। जुर्माने और उससे संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार होगी।
बच्ची से जुड़ा यह मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में काफी आक्रोश देखने को मिला था। नाबालिग के साथ हुए अपराध ने लोगों को झकझोर दिया था और दोषी के लिए कड़ी सजा की मांग उठी थी।
निचली अदालत द्वारा दोषी को मृत्युदंड दिए जाने के बाद मामला हाईकोर्ट के समक्ष पहुंचा। हाईकोर्ट में सजा की पुष्टि और अपील से जुड़े कानूनी पहलुओं पर सुनवाई हुई। अदालत ने परिस्थितियों और मामले के सभी पहलुओं पर विचार करते हुए मृत्युदंड को उम्रकैद में बदल दिया।
कानून के अनुसार, मौत की सजा बेहद असाधारण मामलों में दी जाती है और अदालत सजा तय करते समय अपराध की गंभीरता के साथ अन्य परिस्थितियों पर भी विचार करती है। इसी प्रक्रिया के तहत हाईकोर्ट ने मामले में मृत्युदंड की जगह आजीवन कारावास को उचित माना।
फैसले के बाद अब दोषी को उम्रकैद की सजा के तहत जेल में रहना होगा। मामले से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं और जुर्माने की प्रक्रिया भी अदालत के आदेश के अनुसार आगे बढ़ेगी।
इस फैसले ने एक बार फिर गंभीर आपराधिक मामलों में सजा तय करने को लेकर न्यायिक प्रक्रिया और परिस्थितियों के महत्व को सामने रखा है। पीड़ित परिवार के लिए यह मामला लंबे समय से न्याय की प्रक्रिया से जुड़ा रहा है।
कैथल की 7 साल की बच्ची से जुड़े इस दुष्कर्म और हत्या के मामले में हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब दोषी की सजा फांसी से बदलकर उम्रकैद हो गई है। ₹73 लाख के जुर्माने से जुड़ी कार्रवाई भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी।
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