बीके अस्पताल के हार्ट सेंटर पर संकट, मशीनें हटाने पर लगी रोक; 5 महीने पहले हुआ था शुभारंभ

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BK Hospital

फरीदाबाद के बीके अस्पताल में संचालित हार्ट सेंटर के बंद होने और वहां लगी मशीनों को हटाने की तैयारी का मामला सामने आया है। अस्पताल प्रशासन ने फिलहाल मशीनों को सेंटर से बाहर ले जाने पर रोक लगा दी है। खास बात यह है कि इस हार्ट सेंटर का शुभारंभ करीब पांच महीने पहले ही मंत्री विपुल गोयल ने किया था। अब मामला स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय को भेजा गया है।

बीके अस्पताल में हार्ट सेंटर शुरू होने से हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद थी। सरकारी अस्पताल में इस तरह की सुविधा उपलब्ध होने से जरूरतमंद मरीजों को निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम होने की संभावना थी।

लेकिन महज पांच महीने बाद सेंटर के संचालन पर संकट खड़ा होने से मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है। हार्ट सेंटर बंद होने की स्थिति में हृदय संबंधी इलाज के लिए आने वाले मरीजों को दूसरी स्वास्थ्य सुविधाओं का रुख करना पड़ सकता है।

बताया जा रहा है कि सेंटर में लगी चिकित्सा मशीनों को भी वहां से हटाने की तैयारी थी। इसकी जानकारी अस्पताल प्रशासन तक पहुंचने के बाद मशीनों को ले जाने पर फिलहाल रोक लगा दी गई।

अस्पताल प्रशासन नहीं चाहता कि विभागीय स्तर पर अंतिम निर्णय होने से पहले महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण परिसर से हटाए जाएं। इसी कारण मामले को उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया है।

CMO के मुताबिक पूरा मामला स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय को भेज दिया गया है। अब मुख्यालय स्तर पर इसकी समीक्षा के बाद हार्ट सेंटर के भविष्य को लेकर फैसला होने की उम्मीद है।

हार्ट सेंटर के संचालन में क्या समस्या आई और इसे बंद करने की स्थिति क्यों बनी, इस संबंध में विस्तृत प्रशासनिक स्थिति सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सेंटर किस व्यवस्था या समझौते के तहत संचालित किया जा रहा था। यदि किसी निजी एजेंसी या अन्य संस्था की भागीदारी थी तो उससे जुड़े नियम और जिम्मेदारियां भी समीक्षा का हिस्सा हो सकती हैं।

सेंटर में लगी मशीनें हृदय रोगियों की जांच और उपचार के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन्हें हटाए जाने की स्थिति में भविष्य में सेवा दोबारा शुरू करने के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

इसी वजह से मशीनों को बाहर ले जाने पर रोक लगाने के फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अंतिम निर्णय होने तक उपकरण अस्पताल में ही बने रहने की संभावना है।

पांच महीने पहले सेंटर का शुभारंभ होने के कारण इसके इतनी जल्दी बंद होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी किसी परियोजना को शुरू करने से पहले उसके लंबे समय तक संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक होता है।

सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंचते हैं जो निजी अस्पतालों में महंगा इलाज नहीं करा सकते। ऐसे में हार्ट सेंटर जैसी विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा का संचालन उनके लिए विशेष महत्व रखता है।

हार्ट संबंधी आपात स्थिति में समय पर जांच और उपचार मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि अस्पताल में ही विशेषज्ञ सुविधा उपलब्ध हो तो मरीज को दूसरे अस्पताल रेफर करने में लगने वाला समय बच सकता है।

अब स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय के फैसले पर मरीजों और अस्पताल प्रशासन की नजर रहेगी। मुख्यालय यह तय कर सकता है कि सेंटर को दोबारा शुरू किया जाए, मौजूदा व्यवस्था में बदलाव किया जाए या किसी अन्य माध्यम से सेवाएं जारी रखी जाएं।

मंत्री विपुल गोयल द्वारा करीब पांच महीने पहले किए गए शुभारंभ के बाद सेंटर से स्थानीय मरीजों को बेहतर हृदय चिकित्सा सुविधाओं की उम्मीद थी। इसलिए इसके बंद होने का मामला स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण बन गया है।

अस्पताल प्रशासन की ओर से मशीनों को हटाने पर रोक लगाने के बाद फिलहाल उपकरण सुरक्षित रहेंगे। आगे की कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के आधार पर की जाएगी।

फिलहाल बीके अस्पताल के हार्ट सेंटर का मामला मुख्यालय तक पहुंच चुका है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग सेंटर की सेवाएं बहाल करने को लेकर क्या फैसला लेता है और मरीजों को हृदय उपचार की सुविधा कब तक दोबारा मिल पाती है।

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