कुरुक्षेत्र हत्याकांड में आरोपी पत्नी का नया दावा, बोली- पति ने खाया था सल्फास; डॉक्टरों ने ‘दिल निकालने’ की बात नकारी

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Kurukshetra Murder Case

कुरुक्षेत्र के चर्चित हत्याकांड में आरोपी पत्नी की ओर से नया दावा सामने आया है। महिला का कहना है कि उसके पति ने सल्फास खाया था और वह तड़प रहा था। इसी घटनाक्रम के दौरान उसने पति के पेट पर गंभीर चोट पहुंचाने की बात कही है। दूसरी ओर मामले को लेकर चल रही ‘दिल निकालने’ की चर्चा को डॉक्टरों ने नकार दिया है। पुलिस अब महिला के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

मामला सामने आने के बाद से ही हत्या के तरीके और इसके पीछे की वजह को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। आरोपी पत्नी के बयान ने मामले में एक नया पहलू जोड़ दिया है।

महिला ने पूछताछ के दौरान दावा किया कि उसके पति ने पहले सल्फास का सेवन किया था। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी और वह तड़प रहा था।

आरोपी महिला ने इसके बाद पति के पेट पर धारदार वस्तु से वार करने या पेट चीरने से जुड़ी बात कही है। हालांकि उसके बयान की सत्यता पुलिस जांच और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस दावे की हुई, जिसमें मृतक का दिल निकालने की बात कही जा रही थी।

डॉक्टरों की ओर से इस दावे को नकारे जाने की जानकारी सामने आई है। पोस्टमार्टम और मेडिकल जांच से ही यह स्पष्ट किया जा सकता है कि मृतक के शरीर पर किस तरह की चोटें थीं और मौत का वास्तविक कारण क्या रहा।

पुलिस के लिए अब यह निर्धारित करना महत्वपूर्ण है कि मौत जहरीले पदार्थ के प्रभाव से हुई, चोटों के कारण हुई या दोनों परिस्थितियों की इसमें कोई भूमिका रही।

इसके लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ विसरा और अन्य फोरेंसिक जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

सल्फास जैसे जहरीले पदार्थ के सेवन का दावा होने पर वैज्ञानिक जांच से शरीर में संबंधित विषाक्त पदार्थ की मौजूदगी की पुष्टि की जा सकती है।

इसके अलावा घटनास्थल से कोई संदिग्ध पदार्थ, पैकेट या अन्य सामग्री बरामद हुई है या नहीं, यह भी जांच का हिस्सा हो सकता है।

पुलिस आरोपी पत्नी के बयान की समयरेखा भी तैयार कर सकती है। इसमें घटना से पहले पति-पत्नी के बीच क्या हुआ, कथित जहरीला पदार्थ कब लिया गया और इसके बाद क्या घटनाक्रम हुआ, इसकी कड़ियां जोड़ी जाएंगी।

परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों के बयान भी जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

पुलिस यह भी पता लगाएगी कि पति-पत्नी के बीच पहले से किसी तरह का विवाद था या नहीं और घटना वाले दिन ऐसी क्या परिस्थितियां बनीं जिनके बाद यह मामला सामने आया।

आरोपी की ओर से दिया गया बयान अपने आप में अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। उसकी पुष्टि मेडिकल, फोरेंसिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से होना जरूरी है।

इसी तरह सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर चल रहे सनसनीखेज दावों की पुष्टि भी आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही की जानी चाहिए।

डॉक्टरों द्वारा ‘दिल निकालने’ वाली बात नकारे जाने से मामले में चल रही एक प्रमुख चर्चा पर स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट हुई है।

अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के विस्तृत निष्कर्ष इस केस की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

यदि सल्फास सेवन की पुष्टि होती है तो यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि मृतक ने वह पदार्थ खुद लिया था या इसके पीछे कोई अन्य परिस्थिति थी।

वहीं शरीर पर मिली चोटों की प्रकृति से यह निर्धारित करने में मदद मिलेगी कि वे मौत से पहले लगीं या बाद में और उनका मृत्यु में कितना योगदान रहा।

फिलहाल कुरुक्षेत्र हत्याकांड में आरोपी पत्नी ने पति के सल्फास खाने और उसके बाद घटनाक्रम होने का दावा किया है। डॉक्टरों ने मृतक का ‘दिल निकालने’ की चर्चाओं को नकार दिया है। अब पुलिस की जांच, पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट से ही मौत की वास्तविक वजह और घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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