रोहतक में रामपाल दास को लेकर आर्य समाज का सम्मेलन, विद्वानों ने मंच से किया ‘तीसरी वैचारिक लड़ाई’ का आह्वान

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Rohtak News

रोहतक में रामपाल दास को लेकर आयोजित कार्यक्रम में आर्य समाज से जुड़े विद्वान और प्रतिनिधि एक मंच पर पहुंचे। आयोजकों ने इसे कथित ‘पाखंड’ के खिलाफ अभियान बताते हुए आगे की रणनीति पर चर्चा की। मंच से अब ‘तीसरी लड़ाई’ शुरू करने का आह्वान किया गया। आयोजकों ने इसे वैचारिक और सामाजिक जागरूकता से जुड़ा अभियान बताया है।

कार्यक्रम में पहुंचे आर्य समाज के विद्वानों ने धार्मिक और सामाजिक विषयों पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने लोगों से तर्क, वैदिक सिद्धांतों और तथ्यों के आधार पर धार्मिक मान्यताओं को समझने की अपील की।

सम्मेलन के दौरान रामपाल दास की शिक्षाओं और दावों को लेकर भी वक्ताओं ने सवाल उठाए।

आर्य समाज से जुड़े वक्ताओं ने आरोप लगाया कि समाज में कथित अंधविश्वास और पाखंड को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों का वैचारिक स्तर पर विरोध किया जाना चाहिए।

इसी दौरान मंच से ‘तीसरी लड़ाई’ शुरू करने की बात कही गई।

आयोजकों के मुताबिक यह संघर्ष किसी प्रकार की हिंसा से नहीं, बल्कि विचार, संवाद, जागरूकता और वैचारिक प्रचार के माध्यम से आगे बढ़ाने की बात कही गई है।

कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों ने इस अभियान को आगे भी जारी रखने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में लोगों के बीच जाकर अपने विचार रखे जाएंगे और धार्मिक विषयों पर चर्चा की जाएगी।

आर्य समाज के प्रतिनिधियों ने युवाओं को भी सामाजिक और वैचारिक जागरूकता अभियानों से जोड़ने पर जोर दिया।

वक्ताओं का कहना था कि किसी भी धार्मिक दावे को स्वीकार करने से पहले उसके बारे में जानकारी हासिल करना और सवाल करना जरूरी है।

कार्यक्रम में रामपाल दास और उनके अनुयायियों से जुड़े धार्मिक विचारों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने उनके कई दावों से असहमति जताते हुए आर्य समाज की विचारधारा के आधार पर अपनी बात रखी।

हालांकि इस पूरे विवाद में रामपाल दास या उनके प्रतिनिधियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। उनके पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आने पर विवाद से जुड़े दावों और प्रतिदावों की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

धार्मिक और वैचारिक मतभेद से जुड़े मामलों में शांतिपूर्ण संवाद बनाए रखना भी जरूरी है।

किसी व्यक्ति या समूह के धार्मिक विश्वास से असहमति होने पर उसका जवाब तर्क, विचार और संवैधानिक तरीके से दिया जाना चाहिए।

सम्मेलन के बाद आर्य समाज से जुड़े प्रतिनिधि आगे के कार्यक्रमों और अभियान की रूपरेखा तैयार कर सकते हैं।

यह भी तय किया जा सकता है कि अभियान किन जिलों या क्षेत्रों में चलाया जाएगा और इसमें किन विद्वानों तथा संगठनों को शामिल किया जाएगा।

रोहतक में हुए इस कार्यक्रम ने रामपाल दास और आर्य समाज के बीच चल रहे वैचारिक मतभेद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

फिलहाल आर्य समाज से जुड़े विद्वानों ने मंच से कथित ‘पाखंड’ के खिलाफ अभियान को आगे बढ़ाने और ‘तीसरी वैचारिक लड़ाई’ शुरू करने की बात कही है। आने वाले दिनों में संगठन की ओर से घोषित कार्यक्रमों और इस पर रामपाल दास पक्ष की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

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