हरियाणा में दूध की कीमतों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। पशुपालकों की ओर से दूध के मौजूदा भाव में करीब 2 से 3 रुपए की बढ़ोतरी की मांग की जा रही है। यदि यह मांग स्वीकार होती है तो कुछ श्रेणियों में दूध का भाव 100 रुपए प्रति किलो के आसपास पहुंच सकता है। दूध महंगा होने का असर केवल घरेलू बजट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दही, पनीर, घी और दूध से बनने वाली मिठाइयों की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
पशुपालकों का तर्क है कि पशुपालन की लागत लगातार बढ़ रही है। पशु आहार, हरा और सूखा चारा, खल-बिनौला तथा अन्य जरूरी वस्तुओं पर होने वाला खर्च बढ़ने के कारण मौजूदा कीमत पर दूध बेचना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।
इसी वजह से दूध के दाम में 2 से 3 रुपए की बढ़ोतरी की मांग सामने आई है।
हालांकि हरियाणा में दूध की कीमत हर जगह समान नहीं होती। गाय और भैंस के दूध के भाव में अंतर रहता है और कई स्थानों पर दूध की कीमत उसकी फैट मात्रा तथा गुणवत्ता के आधार पर निर्धारित होती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सीधे पशुपालक से मिलने वाले दूध, डेयरी पर बिकने वाले खुले दूध और पैकेटबंद दूध के दाम भी अलग-अलग हो सकते हैं।
ऐसे में 100 रुपए प्रति किलो का आंकड़ा सभी प्रकार के दूध पर समान रूप से लागू होगा, यह जरूरी नहीं है।
यदि स्थानीय स्तर पर दूध की खरीद और बिक्री की कीमत बढ़ती है तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
एक परिवार में प्रतिदिन एक से दो किलो दूध की खपत होने पर मामूली दिखाई देने वाली प्रति किलो बढ़ोतरी भी महीने के घरेलू बजट में अतिरिक्त खर्च जोड़ सकती है।
चाय, बच्चों के लिए दूध और घर में बनने वाले दही-पनीर जैसी रोजमर्रा की जरूरतों पर इसका सबसे पहले असर दिखाई देगा।
व्यावसायिक स्तर पर दूध का इस्तेमाल करने वालों की लागत भी बढ़ सकती है।
हलवाई, मिठाई की दुकानें, होटल, रेस्टोरेंट और चाय विक्रेताओं के लिए दूध प्रमुख कच्चा माल है।
दूध की कीमत बढ़ने पर पनीर, दही, लस्सी, खोया और दूध आधारित मिठाइयों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है।
विशेष रूप से मिठाई कारोबार में दूध और खोये की कीमत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि कच्चे दूध की लागत बढ़ती है तो दुकानदारों के सामने या तो अपना मार्जिन कम करने या उत्पादों की कीमत बढ़ाने का विकल्प रह जाता है।
पशुपालकों के लिए दूसरी ओर मामला उनकी आय और उत्पादन लागत से जुड़ा है।
पशुओं की देखभाल, चिकित्सा, चारे और श्रम पर होने वाला खर्च बढ़ने पर वे दूध के लिए बेहतर कीमत की मांग करते हैं।
दूध उत्पादन से जुड़े छोटे पशुपालकों के लिए कुछ रुपए की बढ़ोतरी भी कुल मासिक आय में महत्वपूर्ण अंतर पैदा कर सकती है।
दाम में प्रस्तावित बढ़ोतरी कब और किन क्षेत्रों में लागू होगी, इसे लेकर स्थानीय दूध समितियों, डेयरी संचालकों और पशुपालकों के फैसले महत्वपूर्ण रहेंगे।
उपभोक्ताओं के लिए भी यह देखना जरूरी होगा कि बढ़ोतरी सीधे पशुपालकों तक पहुंचती है या बाजार की विभिन्न कड़ियों में बंट जाती है।
फिलहाल हरियाणा में पशुपालकों की ओर से दूध के भाव में करीब 2 से 3 रुपए की बढ़ोतरी की मांग के बाद कीमतों को लेकर चर्चा तेज है। कुछ श्रेणियों में भाव 100 रुपए प्रति किलो के करीब पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यदि दूध महंगा होता है तो आने वाले दिनों में दही, पनीर, खोया और मिठाइयों सहित कई डेयरी उत्पादों की कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
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