सुभाष चंद्रा ने ₹22 हजार करोड़ के कर्ज के दावे को बताया भ्रामक, बोले- मेरी निजी उधारी शून्य; लाइव दिखाए दस्तावेज

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Subhash Chandra

उद्योगपति और पूर्व राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्रा ने ₹22 हजार करोड़ के कथित कर्ज को लेकर उठ रहे सवालों पर सफाई दी है। उन्होंने दावा किया कि इस राशि को उनकी निजी उधारी बताकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि उनकी व्यक्तिगत उधारी शून्य है। इस मुद्दे पर उन्होंने लाइव आकर तीन पन्नों का एक दस्तावेज भी दिखाया और अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की।

यह विवाद कारोबारी विजय माल्या की ओर से उठाए गए सवालों के बाद चर्चा में आया है। इसके बाद सुभाष चंद्रा ने सार्वजनिक रूप से सामने आकर कर्ज से जुड़े दावों पर अपना पक्ष रखा।

चंद्रा ने कहा कि ₹22 हजार करोड़ की राशि को उनके व्यक्तिगत कर्ज के रूप में पेश करना सही नहीं है।

उनका दावा है कि व्यक्तिगत तौर पर उन पर कोई उधारी नहीं है। उन्होंने कॉरपोरेट देनदारियों और व्यक्तिगत देनदारियों के बीच अंतर किए जाने पर जोर दिया।

अपनी बात के समर्थन में चंद्रा लाइव आए और तीन पन्नों का दस्तावेज दिखाया।

उन्होंने दस्तावेज के आधार पर यह समझाने का प्रयास किया कि जिस कर्ज को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसकी वास्तविक स्थिति क्या है और उसे उनकी निजी देनदारी बताना क्यों उचित नहीं है।

हालांकि कर्ज से जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड, ऋणदाताओं के दस्तावेज और नियामकीय रिकॉर्ड के आधार पर ही की जा सकती है।

₹22 हजार करोड़ का आंकड़ा किन कंपनियों, किस अवधि और किस प्रकार की देनदारियों को मिलाकर तैयार किया गया है, यह पूरे विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

किसी कारोबारी समूह पर मौजूद कर्ज और उसके प्रमोटर की व्यक्तिगत उधारी तकनीकी तथा कानूनी रूप से अलग-अलग हो सकती है।

इसी वजह से यह स्पष्ट करना जरूरी है कि संबंधित ऋण किस कंपनी के नाम पर था, उसकी जिम्मेदारी किसकी थी और क्या किसी प्रमोटर की व्यक्तिगत गारंटी उससे जुड़ी थी।

चंद्रा ने अपने बयान में उन दावों को चुनौती दी जिनमें बड़ी कर्ज राशि को सीधे उनसे व्यक्तिगत रूप से जोड़ा जा रहा है।

विजय माल्या द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद मामला सोशल मीडिया और कारोबारी जगत में चर्चा का विषय बन गया।

ऐसे में दोनों पक्षों के दावों के साथ आधिकारिक वित्तीय दस्तावेजों को देखना महत्वपूर्ण होगा।

सुभाष चंद्रा की ओर से लाइव दिखाए गए तीन पन्नों के दस्तावेज की पूरी सामग्री और उसमें दिए गए आंकड़े भी इस बहस के लिए अहम हैं।

यदि संबंधित कंपनियों या वित्तीय संस्थानों की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आता है तो उससे कर्ज की वास्तविक स्थिति को और स्पष्ट करने में मदद मिलेगी।

फिलहाल सुभाष चंद्रा ने ₹22 हजार करोड़ के कर्ज को अपनी निजी उधारी बताए जाने के दावे को भ्रामक करार दिया है। उनका कहना है कि उनकी व्यक्तिगत उधारी शून्य है। विजय माल्या के सवालों के बाद उन्होंने लाइव आकर दस्तावेज दिखाते हुए अपना पक्ष रखा है। अब विवाद में संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड और आधिकारिक दस्तावेज सबसे महत्वपूर्ण आधार होंगे।

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