पानीपत में एक बैंक कर्मचारी को कथित तौर पर मां की बीमारी का बहाना बनाकर आर्थिक लेनदेन में फंसाने और बाद में साइबर अपराध से जुड़े मामले में उलझाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि तीन युवकों ने बैंक कर्मी के क्रेडिट कार्ड में करीब 1.25 लाख रुपए डलवाए। संदिग्ध लेनदेन सामने आने के बाद बैंक कर्मचारी से जुड़े चार खाते बंद होने की बात कही जा रही है। पीड़ित ने कुछ लोगों द्वारा लगातार उसके आसपास चक्कर लगाने और दबाव बनाने का आरोप भी लगाया है।
जानकारी के अनुसार बैंक कर्मचारी की पहचान कुछ युवकों से हुई थी। आरोप है कि इनमें से एक ने अपनी मां की बीमारी और इलाज की जरूरत बताकर उससे आर्थिक मदद मांगी।
पीड़ित का कहना है कि उसने मानवीय आधार पर उनकी बात पर विश्वास कर लिया।
इसके बाद कथित तौर पर उसके क्रेडिट कार्ड के माध्यम से करीब 1.25 लाख रुपए का लेनदेन कराया गया। उस समय बैंक कर्मचारी को इस रकम के स्रोत या इससे जुड़े संभावित साइबर अपराध की जानकारी नहीं थी।
बाद में जब लेनदेन संदिग्ध पाया गया तो मामला गंभीर हो गया।
पीड़ित के अनुसार इसके बाद उसके चार बैंक खाते बंद या फ्रीज हो गए। इससे उसकी रोजमर्रा की बैंकिंग और आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं।
अब बैंक कर्मचारी का दावा है कि जिस आर्थिक मदद को उसने सामान्य लेनदेन समझा था, उसी के कारण वह साइबर अपराध से जुड़े मामले में फंस गया।
पुलिस और साइबर क्राइम टीम के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि ₹1.25 लाख की रकम मूल रूप से कहां से आई थी और उसे बैंक कर्मचारी के क्रेडिट कार्ड या खातों के जरिए क्यों भेजा गया।
पूरे मनी ट्रेल की जांच से रकम के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी का पता चल सकता है।
इस तरह के मामलों में बैंक रिकॉर्ड, UPI या अन्य डिजिटल भुगतान विवरण, मोबाइल नंबर, चैट और कॉल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ लोग लगातार उसके आसपास चक्कर लगा रहे हैं, जिससे उसे अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता है।
इन लोगों का संबंधित तीन युवकों से कोई संबंध है या नहीं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
यदि पीड़ित को धमकी या दबाव का सामना करना पड़ रहा है तो पुलिस उन आरोपों की भी अलग से जांच कर सकती है।
मामले में तीन युवकों पर लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं। इसलिए जांच पूरी होने से पहले उन्हें साइबर अपराध में दोषी मानना उचित नहीं होगा।
साइबर अपराध के मामलों में अपराधी कई बार दूसरे लोगों के बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड या डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल रकम आगे भेजने के लिए करते हैं। ऐसे मामलों में खाताधारक को यह साबित करने के लिए रिकॉर्ड उपलब्ध कराने पड़ सकते हैं कि वह जानबूझकर अपराध में शामिल नहीं था।
इसी वजह से किसी परिचित या अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने खाते, क्रेडिट कार्ड, OTP या बैंकिंग सुविधा का इस्तेमाल करके रकम ट्रांसफर करने से बचना जरूरी है।
फिलहाल पानीपत के बैंक कर्मचारी ने तीन युवकों पर मां की बीमारी का बहाना बनाकर उसे आर्थिक लेनदेन में फंसाने का आरोप लगाया है। करीब ₹1.25 लाख के लेनदेन के बाद उसके चार खाते बंद होने की बात सामने आई है। अब साइबर जांच में रकम का स्रोत, लेनदेन की पूरी श्रृंखला और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा।
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