चंडीगढ़ में बंदरों से बढ़ी परेशानी, सेक्टर-22B में महिला पर हमला; शहर में 4 लोगों को काटने का दावा

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चंडीगढ़ : शहर में बंदरों के झुंड एक बार फिर लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। शनिवार को सेक्टर-22B में एक महिला पर बंदर ने हमला कर दिया। महिला के पैर पर तीन जगह चोट आई, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल जाना पड़ा और डॉक्टरों की सलाह पर आवश्यक इंजेक्शन लगवाए गए।

स्थानीय लोगों के मुताबिक हाल के दिनों में शहर में चार लोगों को बंदर काट चुके हैं। बंदरों के झुंड रिहायशी इलाकों में घरों, छतों, बालकनी और गलियों तक पहुंच रहे हैं। इससे खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है।

सेक्टर-22 के निवासियों का कहना है कि कई बार बंदर खाने-पीने की चीजें लेकर जा रहे लोगों के पीछे पड़ जाते हैं। स्थिति को देखते हुए कुछ परिवार बच्चों और बुजुर्गों को अकेले बाहर भेजने से बच रहे हैं।

बंदरों को घरों और छतों से दूर रखने के लिए लोगों ने अपने स्तर पर भी कई तरीके अपनाए हैं। कुछ घरों की छतों और दीवारों पर लंगूर के कटआउट और तस्वीरें लगाई गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इनसे कुछ समय तक बंदर दूर रहते हैं, लेकिन बाद में दोबारा इलाके में दिखाई देने लगते हैं।

चंडीगढ़ नगर निगम इससे पहले लंगूर की आवाज निकालकर बंदरों को भगाने वाले कर्मचारियों की सेवाएं भी ले चुका है। वर्ष 2024 में चार मिमिकर-कम-रेस्क्यू ऑपरेटर तैनात किए गए थे। बाद में इनकी संख्या बढ़ाने की योजना भी सामने आई थी।

सेक्टर-22 में बंदरों से जुड़ी समस्या पुरानी है। वर्ष 2015 में सेक्टर-22C में एक हादसे में 17 वर्षीय युवक की मौत हो गई थी। उस समय बंदरों द्वारा छत पर पानी की टंकी के आसपास गतिविधि के दौरान सीमेंट का एक भारी हिस्सा नीचे गिरने की घटना सामने आई थी, जिसकी चपेट में युवक आ गया था।

बंदरों की बढ़ती समस्या का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है। वर्ष 2018 में मनीमाजरा के शिवालिक एन्क्लेव निवासी ने याचिका दायर कर बंदरों के हमलों और बच्चों से खाने-पीने का सामान छीनने जैसी घटनाओं का मुद्दा उठाया था।

वर्ष 2020 में हाईकोर्ट ने प्रशासन को बंदरों का सर्वे कराने और उनकी संख्या अधिक पाए जाने की स्थिति में आबादी नियंत्रित करने के उपायों की संभावना पर विचार करने को कहा था।

नगर निगम की ओर से वर्ष 2022 में कराए गए सर्वे में चंडीगढ़ में करीब 1,326 बंदर पाए जाने की जानकारी सामने आई थी। उस समय शहर में बंदरों से प्रभावित आठ हॉटस्पॉट भी चिह्नित किए गए थे।

अप्रैल 2026 में भी सेक्टर-7, 8, 9, 14, 15, 15A और 26 समेत कई इलाकों में बंदरों के घरों, छतों और बालकनी तक पहुंचने की शिकायतें सामने आई थीं। अब सेक्टर-22 में महिला पर हुए हमले के बाद स्थानीय लोगों ने समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग तेज कर दी है।

निवासियों का कहना है कि केवल बंदरों को एक स्थान से भगाना पर्याप्त नहीं है। प्रशासन और नगर निगम को यह पता लगाने की जरूरत है कि झुंड किन इलाकों से रिहायशी क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं और नियमों के तहत इनके प्रबंधन के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए।

इसके साथ ही खुले में खाद्य सामग्री और कचरा न छोड़ने को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आसानी से भोजन उपलब्ध होने पर बंदर रिहायशी इलाकों की ओर आकर्षित हो सकते हैं।

प्रशासन की ओर से लोगों को बंदरों को खाना नहीं खिलाने और उन्हें छेड़ने से बचने की सलाह दी जाती रही है। बंदरों से सीधे आंख मिलाने, उनके बच्चों के करीब जाने या उन्हें घेरने से भी बचने को कहा गया है। किसी व्यक्ति को बंदर काट ले या खरोंच दे तो घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह साफ कर जल्द से जल्द चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

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