सिरसा : जिले के मांगेआना गांव में श्मशान भूमि और व्यायामशाला क्षेत्र से करीब 75 हरे पेड़ काटने के मामले में जांच के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है। डबवाली सदर थाना पुलिस ने गांव की सरपंच सुदेश रानी और सरपंच प्रतिनिधि दयानंद शर्मा के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई डीएसपी कालांवाली की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
मामले की शुरुआत मांगेआना गांव निवासी प्रीतपाल सिंह की शिकायत से हुई थी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि गांव की श्मशान भूमि और व्यायामशाला परिसर से करीब 70 से 75 हरे पेड़ काट दिए गए और उन्हें बेच दिया गया।
शिकायत सामने आने के बाद मामले की जांच शुरू की गई। बीडीपीओ डबवाली और वन मंडल अधिकारी सिरसा की टीमों ने मौके का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने पेड़ों की स्थिति और वहां कराए गए विकास कार्यों से संबंधित जानकारी जुटाई।
जांच में सामने आया कि श्मशान भूमि और व्यायामशाला में सड़क और ट्रैक तैयार करने के दौरान करीब 75 छोटे-बड़े पेड़ काटे गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान खिलाड़ियों की ओर से लगाए गए कुछ पौधों को भी नुकसान पहुंचा।
जांच में यह भी सामने आया कि पेड़ों को काटने से पहले वन विभाग से अनुमति नहीं ली गई थी। इसके अलावा काटे गए पेड़ों की कीमत का भी पहले से आकलन नहीं कराया गया था। इन्हीं तथ्यों को जांच में शामिल किया गया।
पुलिस के अनुसार काटे गए पेड़ों की अनुमानित कीमत करीब 40 हजार रुपए बताई गई है। डीएसपी कालांवाली की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद डबवाली सदर थाना पुलिस ने सरपंच सुदेश रानी और सरपंच प्रतिनिधि दयानंद शर्मा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 305 के तहत मामला दर्ज किया है।
इससे पहले सिरसा जिले के कालुआना गांव में भी जलघर परिसर से हरे पेड़ काटे जाने का मामला चर्चा में आया था। वहां करीब 31 हरे पेड़ काटने के आरोपों को लेकर मामला प्रशासनिक स्तर पर उठा था। यह मुद्दा ग्रीवेंस मीटिंग में भी पहुंचा और जांच व कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
अब मांगेआना गांव के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस इससे जुड़े दस्तावेजों और अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। पेड़ किन परिस्थितियों में काटे गए, उनसे संबंधित निर्णय किस स्तर पर लिया गया और काटी गई लकड़ी के संबंध में क्या प्रक्रिया अपनाई गई, इन पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
फिलहाल सरपंच और सरपंच प्रतिनिधि के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।
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