गुरुग्राम में अडानी रियल्टी के सेल्स मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा की हत्या की जांच अब वारदात में इस्तेमाल हथियारों के स्रोत पर केंद्रित है। पुलिस सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि आरोपी आन्या वत्स ने उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सिपाही से दो अवैध देसी पिस्तौल और कारतूस खरीदे थे। हालांकि, पुलिस ने इस दावे या किसी सिपाही की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। हथियार किसने उपलब्ध कराए, इसकी जांच जारी है।
मामले में आन्या वत्स और उनके लिव-इन पार्टनर संयम सचदेवा न्यायिक हिरासत में हैं। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आन्या करीब तीन महीने से हत्या की योजना बना रही थीं और कथित हथियार सौदे में दो लाख रुपये दिए गए थे। पुलिस दोनों आरोपियों को दोबारा रिमांड पर लेकर हथियारों की खरीद और उनसे जुड़े लोगों के बारे में पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।
जांच में करीब एक करोड़ रुपये के वित्तीय विवाद को हत्या का संभावित कारण बताया जा रहा है। आरोप है कि युवराज अपने दिए हुए पैसे वापस मांग रहे थे। पुलिस के मुताबिक, छह सितंबर की रात उनकी हत्या के बाद उनके मोबाइल से परिवार को दिल्ली से बेंगलुरु की कथित फर्जी फ्लाइट टिकट का स्क्रीनशॉट और बिजनेस यात्रा का संदेश भेजा गया, ताकि परिवार को उनके लापता होने पर तुरंत संदेह न हो। इन दावों की जांच और अदालत में पुष्टि होना बाकी है।
युवराज छह सितंबर को दिल्ली के लाजपत नगर से लापता हुए थे। उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट 11 सितंबर को दर्ज हुई। गुरुग्राम पुलिस को 10 सितंबर को बादशाहपुर क्षेत्र के एक नाले से शव मिला, जिसका अज्ञात मानकर 14 सितंबर को अंतिम संस्कार कर दिया गया था।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली की साकेत अदालत ने शव की पहचान के प्रयासों और अंतिम संस्कार से संबंधित पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं तथा वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब मांगा है। पुलिस युवराज की हत्या, शव की पहचान में हुई देरी और हथियारों की आपूर्ति से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
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