सोनीपत के गन्नौर क्षेत्र के गुमड़ गांव की एथलीट किरण पहल ने एशियाई खेलों में रिले स्पर्धा में गोल्ड और टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीतकर परिवार और गांव को खुशी दी है। आर्थिक मुश्किलों और अभ्यास पर लगी रोक के बीच आगे बढ़ीं किरण के स्वागत की तैयारी चल रही है। वह एक अक्टूबर को दिल्ली पहुंचेंगी, जिसके बाद गांव में उनका स्वागत किया जाएगा।
किरण तीसरी कक्षा में जिम्नास्टिक करती लड़कियों को देखकर खेलों की ओर आकर्षित हुई थीं। पांचवीं कक्षा में स्कूल की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और जीत हासिल की। वर्ष 2009 में दौड़ का अभ्यास शुरू किया, लेकिन परिवार तक पहुंची एक शिकायत के बाद उनकी प्रैक्टिस बंद करवा दी गई। करीब पांच महीने बाद परिवार को मनाकर वह मैदान में लौटीं।
अभ्यास के लिए उन्हें घर से करीब दो किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। पिता ओमप्रकाश कोर्ट में मुंशी थे और परिवार की आमदनी सीमित थी। वर्ष 2012 में पिता ने कबाड़ी से 300 रुपए की पुरानी साइकिल खरीदकर दिलाई। खेल के जूतों की कीमत 11 हजार रुपए होने पर दादी ने अपनी बुढ़ापा पेंशन से मदद की।
बेहतर ट्रेनिंग के लिए किरण वर्ष 2015 में रोहतक गईं। किराए और डाइट का खर्च उठाने के लिए उन्होंने पतंजलि स्टोर पर चार हजार रुपए महीने की नौकरी की। सुबह अभ्यास, दिन में नौकरी और शाम को दोबारा ट्रेनिंग उनकी दिनचर्या बन गई।
वर्ष 2018 में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में दो गोल्ड जीतने के बाद रेलवे में नौकरी का अवसर मिला। दसवीं पास नहीं होने से अड़चन आई तो उन्होंने दोबारा पढ़ाई की और वर्ष 2019 में परीक्षा पास की। जून 2021 में रेलवे में जूनियर क्लर्क की नौकरी मिली।
वर्ष 2022 में बीमार पिता से किरण ने ओलिंपिक पदक लाने का वादा किया। उसी साल पिता का निधन हो गया। किरण ने पेरिस ओलिंपिक-2024 में भाग लिया, हालांकि पदक नहीं मिला। अब एशियाई खेलों की सफलता से परिवार उत्साहित है। बहन तमन्ना के अनुसार, घर लौटने पर मां किरण के पसंदीदा चने के लड्डू बनाएंगी।
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