भिवानी के मनीषा मामले में पिता संजय कुमार ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए विरोध याचिका प्रस्तुत की है। उन्होंने रिपोर्ट खारिज करने और मामले की दोबारा गहन जांच कराने की मांग की है। याचिका में जांच की निष्पक्षता, फोरेंसिक निष्कर्षों, सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्यों की कस्टडी को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
संजय का आरोप है कि जांच में महत्वपूर्ण गवाहों के बयान और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की अनदेखी की गई। उन्होंने सीबीआई के उस निष्कर्ष को चुनौती दी है, जिसमें मनीषा की मौत को मोनोक्रोटोफॉस कीटनाशक सेवन से आत्महत्या बताया गया। याचिका में हत्या और संभावित यौन उत्पीड़न की आशंका की जांच करने की मांग रखी गई है।
याचिका के अनुसार, मनीषा को 11 अगस्त 2025 की दोपहर करीब दो बजे किड्स केयर प्ले स्कूल से निकलते देखा गया था। शिक्षिकाओं मोनिका और कविता के बयानों का हवाला देकर कहा गया है कि मनीषा ने आइडियल नर्सिंग कॉलेज में काम होने की बात बताई थी। एक दुकान की कैमरा फुटेज में भी उसे संस्थान की दिशा में जाते देखे जाने का उल्लेख है।
पिता ने आरोप लगाया कि लापता होने और 13 अगस्त को शव मिलने के दौरान संस्थान परिसर की पर्याप्त तलाशी नहीं ली गई। परिसर के करीब 20 कैमरों की फुटेज नहीं जुटाने और अलग-अलग कैमरों के समय का अंतर ठीक किए बिना घटनाक्रम तैयार करने पर भी आपत्ति जताई गई है।
याचिका में डीवीआर लेने की प्रक्रिया, संदिग्ध वाहन में मौजूद व्यक्तियों की पहचान नहीं करने और घटनास्थल पर बताए गए घसीटने तथा टायर के निशानों की जांच पर सवाल हैं। फोरेंसिक रिपोर्ट और तस्वीरों की व्याख्या के आधार पर भी आत्महत्या के निष्कर्ष को चुनौती दी गई है।
इसके अलावा, पोस्टमॉर्टम के दौरान लिए गए नमूनों को प्रयोगशाला में जमा कराने तक उनकी कस्टडी का स्पष्ट विवरण मांगते हुए संभावित कमियों की जांच का अनुरोध किया गया है। ये आरोप और व्याख्याएं पिता की याचिका में प्रस्तुत पक्ष हैं। उपलब्ध विवरण में याचिका पर अदालत के निर्णय या सीबीआई के जवाब का उल्लेख नहीं है।
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