धर्म व मर्यादा की स्थापना के लिए हुआ श्रीराम का अवतार: मधरेश दास महाराज श्रीराम जन्म के प्रसंग से गूंजा शिव शक्ति कृपा मंदिर श्रद्धालुओं ने लगाए जय श्रीराम के जयघोष

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Safidon News
सफीदों, (एस• के• मित्तल) : नगर की गुरुद्वारा गली स्थित श्री शिव शक्ति कृपा मंदिर में चल रहे सामूहिक संगीतमय श्री रामायण पाठ महोत्सव में बुधवार को भगवान श्रीराम के जन्म का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया गया। श्रीराम जन्म की कथा के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया और जय श्रीराम के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। अयोध्या से पधारे व्यास मधरेश दास महाराज ने श्रीराम जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का अवतार केवल रावण के वध के लिए नहीं, बल्कि धर्म की स्थापना और मर्यादा का संदेश देने के लिए हुआ था। श्रीराम का चरित्र हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सत्य, धर्म और कर्तव्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने पुत्र, भाई, पति, मित्र और राजा के रूप में अपने प्रत्येक दायित्व का आदर्श प्रस्तुत किया। उनके जीवन में त्याग, संयम, करुणा और मर्यादा का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्म का प्रसंग श्रद्धालुओं को अपने जीवन में श्रीराम के आदर्शों को उतारने की प्रेरणा देता है। केवल श्रीराम का नाम लेने से ही नहीं, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। वहीं वेदाचार्य दंडी स्वामी डॉ. निगमबोध तीर्थ महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का चरित्र भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में आदर्श जीवन का प्रतीक है। श्रीराम ने विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और मर्यादा का साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने अपने आचरण से यह संदेश दिया कि व्यक्ति को अपने अधिकारों से पहले अपने कर्तव्यों को महत्व देना चाहिए। श्रीराम का जीवन सत्य, त्याग, अनुशासन, सेवा और धर्म के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि रामायण का श्रवण तभी सार्थक है, जब उसके संदेश को अपने व्यवहार और जीवन में अपनाया जाए। परिवार में प्रेम, समाज में सद्भाव और जीवन में सत्य एवं मर्यादा को स्थान देना ही श्रीराम के चरित्र से मिलने वाली वास्तविक प्रेरणा है।

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