कुरुक्षेत्र में धान खरीद की कैपिंग और जिले की सीमा संबंधी शर्त हटाने की मांग को लेकर किसान संगठनों ने रविवार को प्रदर्शन का ऐलान किया है। किसान मार्केट कमेटी कार्यालयों का घेराव कर धरना देंगे और तालाबंदी करेंगे। सरकार के पुतले फूंकने की भी घोषणा की गई है। संगठनों की मांग है कि किसानों की पूरी धान की फसल खरीदी जाए।
चार दिन पहले अंतरराष्ट्रीय जाट धर्मशाला में किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के बैनर तले नौ किसान संगठनों ने बैठक की थी। इसी बैठक में मांगों को लेकर मार्केट कमेटी कार्यालयों पर तालाबंदी का फैसला लिया गया था।
शहीद भगत किसान यूनियन के जिला प्रधान एडवोकेट संजू नंबरदार ने कहा कि सरकार और कृषि संस्थान अधिक पैदावार वाली किस्में लगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करते हैं। प्रमाणित बीजों से उत्पादन बढ़ने के बाद खरीद की सीमा तय करना किसानों के साथ उचित नहीं है। उन्होंने कैपिंग तुरंत हटाने की मांग की।
यूनियन के महासचिव दिलबाग सिंह ने कहा कि कई किसानों के खेतों से दूसरे जिले की मंडी नजदीक पड़ती है, जबकि अपने जिले की मंडी दूर होती है। किसानों को खेत या गांव से 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाली किसी भी मंडी में धान बेचने की अनुमति मिलनी चाहिए।
इस बीच पिहोवा में मार्केट कमेटी कार्यालय पर दो दिनों से चल रहा धरना शनिवार रात समाप्त कर दिया गया। प्रशासन ने रविवार सुबह 11 बजे से खरीद शुरू करने का आश्वासन दिया। राइस मिलरों के सहयोग की बात पर भी सहमति बनी। इसके बाद किसानों ने धरना वापस ले लिया।
भारतीय किसान यूनियन चढूनी के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने दावा किया कि पोर्टल पर अभी 7.59 लाख एकड़ का सत्यापन लंबित है। उन्होंने अधिकारियों पर जानबूझकर सत्यापन रोकने का आरोप लगाया। इन आरोपों पर प्रशासन का पक्ष उपलब्ध विवरण में नहीं है।
चढूनी ने पांच अक्टूबर को सुबह दस बजे शहीद ऊधम सिंह स्मारक पर किसानों को एकत्र होने का आह्वान किया है। उन्होंने लाठी लेकर पहुंचने और लाठीचार्ज होने पर जवाब देने संबंधी विवादित बयान भी दिया। प्रस्तावित आंदोलन का केंद्र धान खरीद से जुड़ी समस्याएं हैं।
![]()











