हरियाणा के वीरेंद्र प्रताप उर्फ काला राणा की नियमित जमानत याचिका मोहाली अदालत ने खारिज कर दी है। मामला अवैध हथियारों की बरामदगी और आपराधिक साजिश से जुड़ा है। अदालत ने मामले की गंभीरता तथा जमानत याचिका में आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी नहीं देने को फैसले का अहम आधार माना।
सरकारी पक्ष ने पुलिस रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि आरोपी के खिलाफ 27 आपराधिक मामले दर्ज हैं। अदालत के अनुसार, काला राणा ने अपनी याचिका में इन मामलों का उल्लेख नहीं किया था। सरकार की ओर से रिकॉर्ड रखे जाने के बाद बचाव पक्ष ने रिकॉर्ड पेश करने की अनुमति मांगी, लेकिन अदालत ने यह अर्जी भी खारिज कर दी।
इस मामले की शुरुआत 8 अक्टूबर 2023 को मोहाली के बलौंगी क्षेत्र में हुई थी। पुलिस के मुताबिक, गुप्त सूचना पर ग्रीन एन्क्लेव के पास अजय नामक युवक को पकड़ा गया। तलाशी में उसके पास से .32 बोर की दो देसी पिस्तौल और आठ जिंदा कारतूस मिले। सूचना थी कि वह घड़ुआं में किसी वारदात की तैयारी कर रहा था।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में अजय ने जग्गू भगवानपुरिया और अमृत बल से संपर्क होने की बात कही। उसने केसर सिंह के जरिए हथियार और नकदी मिलने की जानकारी भी दी। पुलिस का दावा है कि केसर सिंह व्हाट्सएप पर काला राणा के संपर्क में था।
अजय से मिली जानकारी के बाद 11 अक्टूबर 2023 को केसर सिंह को गिरफ्तार किया गया। काला राणा को भी साजिश और आर्म्स एक्ट के तहत आरोपी बनाया गया। वह दूसरे मामलों में पहले से जेल में था, इसलिए इस केस में उसकी औपचारिक कस्टडी दर्ज की गई।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि काला राणा करीब तीन साल से इस मामले में जेल में है और ट्रायल शुरू नहीं हुआ। वकील ने पुराने मामलों में बरी होने या सजा पर रोक होने का दावा भी किया।
सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए गंभीर आपराधिक मामलों और रिकॉर्ड छिपाने का मुद्दा उठाया। अदालत ने इन परिस्थितियों में नियमित जमानत देने का ठोस आधार नहीं पाया।
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