युवराज मनचंदा हत्याकांड में बादशाहपुर SHO निलंबित, डॉक्टर और फॉरेंसिक टीम पर विभागीय जांच

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Gurugram News

गुरुग्राम के रियल एस्टेट मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा हत्याकांड में शव की पहचान और शुरुआती जांच में कथित लापरवाही को लेकर कार्रवाई हुई है। बादशाहपुर थाना प्रभारी राजेश को निलंबित कर दिया गया है। पोस्टमार्टम करने वाले मेडिकल अधिकारी डॉ. मानव चौहान, फॉरेंसिक टीम की डॉ. रिचा शर्मा, उनके टीम सदस्य और पुलिस कंट्रोल रूम की एक महिला एसआई के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है।

31 वर्षीय युवराज अडानी रियल्टी में सेल्स मैनेजर थे। वह 6 सितंबर को लापता हुए थे। 10 सितंबर को उनका शव बादशाहपुर के पास नाले से मिला। पहचान नहीं होने पर पुलिस ने 14 सितंबर को अज्ञात शव के रूप में अंतिम संस्कार कर दिया। बाद में दिल्ली पुलिस की जांच में शव की पहचान युवराज के रूप में हुई।

मृतक की बहन हरसिमरन मनचंदा मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर पहुंचीं। उन्होंने शव की शिनाख्त और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार, शव मिलने के छह दिन बाद 16 सितंबर को उसकी जानकारी जोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क यानी ZIPNET पर अपलोड की गई। तब तक अंतिम संस्कार हो चुका था।

परिवार की शिकायत है कि समय पर जानकारी साझा होती तो उन्हें पहचान और अंतिम विदाई का अवसर मिल सकता था। युवराज की गुमशुदगी की रिपोर्ट दिल्ली के लाजपत नगर थाने में पहले से दर्ज थी। इसके बावजूद संबंधित पुलिस इकाइयों के बीच सूचना साझा करने की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।

शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह डूबना बताई गई थी। बाद में दिल्ली पुलिस की तकनीकी जांच में युवराज की पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा का नाम सामने आया। दोनों को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने पैसों के विवाद में युवराज की गोली मारकर हत्या करने की बात स्वीकार की। इसके बाद मेडिकल और फॉरेंसिक जांच में चोटों की पहचान तथा पुलिस की कार्रवाई की समीक्षा शुरू हुई। विभागीय जांच में संबंधित अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी तय की जाएगी।

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