झज्जर जिले के मातनहेल गांव में पानी की किल्लत को लेकर वर्ष 2017 में हुए रोड जाम से जुड़े मामले में सीजेएम कोर्ट ने रतन सिंह को दोषी ठहराकर 600 रुपये का जुर्माना लगाया है। सुनवाई के दौरान रतन सिंह ने स्वेच्छा से अपराध स्वीकार किया। इसके बाद अदालत ने तीन धाराओं में 200-200 रुपये का जुर्माना लगाया। उसने अदालत में ही पूरी राशि जमा कर दी।
मामला 22 अगस्त 2017 का है। मातनहेल में पानी की समस्या से परेशान ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए सड़क जाम की थी। आरोप था कि गांव के वाई-पॉइंट पर सड़क पर पत्थर डाले गए और कुछ मोटरसाइकिलें आड़ी-तिरछी खड़ी कर दी गईं। इससे वाहनों और पैदल लोगों के आवागमन में बाधा उत्पन्न हुई थी।
सूचना मिलने पर जन स्वास्थ्य विभाग के जेई जय भगवान, एक्सईएन जगदीश चंदर और पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें समझाया। इसके बाद रास्ता खुलवाया गया और आवागमन बहाल हुआ।
जन स्वास्थ्य विभाग के जेई जय भगवान की शिकायत पर साल्हावास थाने में एफआईआर नंबर 221 दर्ज की गई थी। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 283, 341 और 149 के तहत कार्रवाई हुई। पुलिस ने रतन सिंह सहित अन्य ग्रामीणों के खिलाफ चालान अदालत में पेश किया था। मामला झज्जर की सीजेएम कोर्ट में विचाराधीन रहा।
करीब नौ साल बाद सुनवाई के दौरान रतन सिंह ने अदालत के समक्ष बिना किसी दबाव के अपना अपराध स्वीकार किया। सीजेएम डॉ. मोनिका खनगवाल ने उसका बयान रिकॉर्ड किया। अदालत ने माना कि स्वेच्छा से अपराध स्वीकार करने से न्यायालय का समय और ऊर्जा बची।
अदालत ने धारा 283, 341 और 147 के तहत अलग-अलग 200 रुपये का जुर्माना लगाया। आदेश में जुर्माना नहीं चुकाने की स्थिति में 15 दिन के साधारण कारावास का प्रावधान रखा गया था। रतन सिंह ने मौके पर ही कुल 600 रुपये जमा कर रसीद प्राप्त कर ली।
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