चंडीगढ़। हरियाणा में बिजली वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण के लिए 25 वर्ष का लाइसेंस जारी किया है। प्रदेश में पहली बार किसी निजी कंपनी को सरकारी बिजली वितरण निगम के समानांतर बिजली आपूर्ति करने की अनुमति मिली है। इस फैसले के बाद दोनों जिलों के करीब साढ़े आठ लाख उपभोक्ताओं के सामने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVNL) के अतिरिक्त एक अन्य कंपनी का विकल्प उपलब्ध होने की संभावना है। पूर्व आईएएस अधिकारी आलोक निगम की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति की समीक्षा के बाद लाइसेंस जारी किया गया। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत निजी कंपनी अपना अलग बिजली वितरण नेटवर्क विकसित करेगी। इसमें आधुनिक 33 केवी वितरण प्रणाली, गैस इंसुलेटेड कॉम्पैक्ट सब-स्टेशन, भूमिगत केबल और कवर्ड कंडक्टर का उपयोग करने की योजना है। कंपनी का दावा है कि आधुनिक तकनीक से बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ेगी और तकनीकी खराबियों को कम करने में मदद मिलेगी। गुरुग्राम जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कम जगह घेरने वाले सब-स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। वहीं, नूंह जिले में बिजली ढांचे के विस्तार के लिए लगभग 305 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बताई गई है। इसके अंतर्गत नए सब-स्टेशन, ट्रांसफॉर्मर और वितरण लाइनें विकसित की जाएंगी। प्रस्तावित व्यवस्था में उपभोक्ताओं को कंपनी बदलने से पहले पुराने बिजली बिलों का बकाया चुकाना होगा। हालांकि, नई कंपनी की वास्तविक सेवा शुरू होने, बिजली दरों और कनेक्शन प्रक्रिया को लेकर विस्तृत स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। दूसरी ओर, हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने इस फैसले का विरोध किया है। कर्मचारी संगठनों ने सरकारी बिजली निगम और लगभग 40 हजार कर्मचारियों के भविष्य को लेकर चिंता जताई है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज भी फैसले के खिलाफ विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में अपील करने की बात कह चुके हैं। ऐसे में निजी बिजली वितरण की नई व्यवस्था लागू होने से पहले कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर विवाद बढ़ने की संभावना है।
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