चंडीगढ़। हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) के चेयरमैन आलोक वर्मा का छह वर्षीय कार्यकाल 22 अक्टूबर 2026 को पूरा होने जा रहा है। भारतीय वन सेवा (IFS) से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद उन्होंने 23 अक्टूबर 2020 को आयोग के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके कार्यकाल में विभिन्न सरकारी विभागों की भर्तियों के साथ चयन प्रक्रिया, न्यूनतम योग्यता मानदंड और खाली रह गए पदों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे।
आलोक वर्मा के नेतृत्व में आयोग ने हरियाणा सिविल सेवा (HCS), असिस्टेंट प्रोफेसर, पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT), मेडिकल ऑफिसर, कृषि विकास अधिकारी और लेक्चरर सहित विभिन्न पदों पर भर्ती प्रक्रियाएं शुरू कीं।
10 हजार पदों के मुकाबले करीब 4500 चयन
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, छह वर्षों के दौरान आयोग ने लगभग 10 हजार पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की। हालांकि, इनमें से करीब 4500 अभ्यर्थियों का ही अंतिम चयन हो पाया और उन्हें सरकारी नौकरियां मिलीं।
इन आंकड़ों के आधार पर चयनित उम्मीदवारों की संख्या कुल प्रस्तावित पदों के लगभग 45 प्रतिशत रही। हालांकि, शेष पदों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए लंबित, रद्द और पूरी हो चुकी भर्तियों का अलग-अलग विवरण आवश्यक है।
35 प्रतिशत अंक की शर्त पर विवाद
आयोग की भर्ती प्रक्रियाओं में 35 प्रतिशत न्यूनतम अंक प्राप्त करने की शर्त प्रमुख विवादों में रही। इस मानदंड को चयन की कम संख्या का एक महत्वपूर्ण कारण बताया गया।
भर्ती परीक्षाओं में न्यूनतम योग्यता अंक निर्धारित करने की व्यवस्था को लेकर अभ्यर्थियों के बीच असंतोष और सवाल सामने आते रहे। चयन प्रक्रिया के परिणामों और रिक्त पदों की संख्या ने भी आयोग की कार्यप्रणाली को चर्चा में बनाए रखा।
नए अध्यक्ष के सामने रहेंगी चुनौतियां
आलोक वर्मा का कार्यकाल समाप्त होने के साथ आयोग के अगले नेतृत्व के सामने भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी लाने और रिक्त पदों को भरने जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी।
इसके अलावा चयन मानदंडों में स्पष्टता, परीक्षाओं की पारदर्शिता और उम्मीदवारों का भरोसा बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा। अब निगाहें सरकार द्वारा नए अध्यक्ष की नियुक्ति और आयोग की आगामी भर्ती नीतियों पर टिकी हैं।
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