अहीरवाल में सियासी जमीन मजबूत करने की तैयारी में JJP, महेंद्रगढ़ में मनाएगी नौवां स्थापना दिवस; भाजपा-कांग्रेस के बीच जगह बनाना बड़ी चुनौती

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महेंद्रगढ़। राजनीति की राजनीति में दोबारा मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रही जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) ने दक्षिण हरियाणा के अहीरवाल क्षेत्र में संगठन विस्तार की रणनीति तैयार की है। पार्टी ने छह दिसंबर को अपना नौवां स्थापना दिवस महेंद्रगढ़ जिले में मनाने का फैसला किया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और डॉ. अजय सिंह चौटाला की क्षेत्र में बढ़ती सक्रियता के बीच इस आयोजन को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के साथ गठबंधन कर सरकार में शामिल हुई जेजेपी को 2024 के विधानसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी। इसके बाद पार्टी के सामने पुराने जनाधार को वापस हासिल करने और संगठन को दोबारा मजबूत बनाने की चुनौती है। अहीरवाल क्षेत्र में पिछले एक दशक से भाजपा का प्रभाव रहा है। वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में गुरुग्राम, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ क्षेत्र की 11 सीटों में से 10 पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। कांग्रेस भी यहां प्रमुख राजनीतिक ताकत बनी हुई है। महेंद्रगढ़ जिले की अटेली, महेंद्रगढ़, नारनौल और नांगल चौधरी विधानसभा सीटों पर मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच रहा है। ऐसे में जेजेपी के लिए क्षेत्र में अलग राजनीतिक पहचान स्थापित करना आसान नहीं होगा। राजनीतिक विश्लेषण के अनुसार, स्थापना दिवस समारोह में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को जुटाने के साथ पार्टी को गांव और बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की आवश्यकता होगी। युवाओं के रोजगार, किसानों की समस्याओं और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों पर लगातार सक्रियता भी महत्वपूर्ण रहेगी। पार्टी नेतृत्व के सामने स्थानीय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने और नए मतदाताओं को जोड़ने की चुनौती है। जेजेपी के जिला अध्यक्ष राजकुमार खातोद ने बताया कि प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर स्थापना दिवस समारोह की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। कार्यक्रम स्थल अभी निर्धारित नहीं हुआ है। इसके लिए पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से विचार-विमर्श किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि समारोह में प्रदेशभर से पार्टी कार्यकर्ता पहुंचेंगे और इसके बाद हरियाणा की राजनीति में बदलाव दिखाई देगा। फिलहाल जेजेपी के लिए सबसे बड़ी परीक्षा इस आयोजन की सक्रियता को स्थायी जनसमर्थन में बदलने की होगी।

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