थाईलैंड के जरिये म्यांमार भेजे जा रहे थे भारतीय युवक
हरियाणा के युवकों के शामिल होने वाला एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय मानव-तस्करी गिरोह सामने आया है, जो भारतीय युवाओं को बेहतर रोजगार का लालच देकर विदेश ले जाने का दावा करता था। जांच के दौरान पता चला कि यह नेटवर्क युवाओं को पहले थाईलैंड भेजता था और वहां से उन्हें म्यांमार की सीमा पार करवाकर चीनी गैंगस्टरों के नियंत्रित क्षेत्रों में पहुंचाया जाता था। इस अवैध काम में युवकों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी और आर्थिक अपराधों के लिए किया जाता था।
सूत्रों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया में तस्करों को प्रति व्यक्ति करीब 3,000 डॉलर (करीब ढाई लाख रुपये) कमीशन मिलता था। कई मामलों में पीड़ितों से पहले पासपोर्ट, वीजा और टिकट के नाम पर मोटी रकम ली जाती थी। थाईलैंड पहुंचते ही बिचौलिए उन्हें एयरपोर्ट से उठा लेते थे और आठ से दस घंटे की यात्रा के बाद जंगलों के रास्ते उन्हें म्यांमार ले जाया जाता था। वहां स्थित कैंपों में युवाओं को बंधक बनाकर रखा जाता था और उनसे जबरन अवैध कॉलिंग व फ्रॉड कार्य कराए जाते थे।
पीड़ितों के अनुसार, प्रतिरोध करने पर मारपीट, धमकी और भारी भरकम रकम के बदले उन्हें छुड़ाने का दबाव बनाया जाता था। कई युवकों ने बताया कि म्यांमार के अवैध कैंपों में भारतीय, नेपाली और अफ्रीकी देशों के लोग बड़ी संख्या में फंसे हुए थे। कुछ मामलों में चीन-आधारित अपराध सिंडिकेट इन कैंपों को संचालित कर रहा था।
भारत में साइबर क्राइम विंग और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मिलीभगत से इस रैकेट पर कार्रवाई की जा रही है। कई पीड़ितों को बचाया जा चुका है और गिरफ्तारियां भी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया और फर्जी प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है, इसलिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
![]()











