कागजी लेन-देन के सहारे निकाला गया अनाज,
मिल मालिक और आढ़तियों पर केस दर्ज
हरियाणा के करनाल जिले में धान के कारोबार से जुड़ा एक गंभीर वित्तीय घोटाला सामने आया है। इस मामले में करीब ₹77 लाख की धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। शिकायत के अनुसार फर्जी बिल तैयार कर बिना गेट पास के धान को बाजार में बेच दिया गया। इस पूरे मामले में एक राइस मिल मालिक, आढ़ती और उनके साथियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, पीड़ित पक्ष को तब शक हुआ जब स्टॉक और कागजों का मिलान किया गया। रिकॉर्ड में धान का उठान और बिक्री दिखाई गई, लेकिन गोदाम और मिल परिसर में माल मौजूद नहीं था। जांच में सामने आया कि कथित तौर पर फर्जी बिल बनाए गए और धान को बिना आधिकारिक गेट पास के बाहर भेज दिया गया।
आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए लाखों रुपये का धान अवैध रूप से बेचा गया और उसका भुगतान भी संबंधित खातों में दर्ज नहीं किया गया। पीड़ित का कहना है कि इस लेन-देन से उसे भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में धोखाधड़ी के स्पष्ट संकेत मिले हैं। दस्तावेजों, बिलों और स्टॉक रजिस्टर की गहनता से जांच की जा रही है। साथ ही मंडी समिति और संबंधित विभागों से भी रिकॉर्ड मंगवाए गए हैं, ताकि पूरे लेन-देन की कड़ी को जोड़ा जा सके।
इस मामले में राइस मिल मालिक, आढ़ती और अन्य सहयोगियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
धान कारोबार से जुड़ा यह मामला किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं कृषि व्यापार की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती हैं। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी।
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