कर्ज वसूली रुकी तो सामने आई गड़बड़ी, निजी कंपनी ने शुरू कराई व्यापक जांच
हरियाणा के डबवाली इलाके में कृषि उपकरणों के लिए दिए जाने वाले ऋण से जुड़ा एक गंभीर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। एक निजी फाइनेंस कंपनी को तब संदेह हुआ, जब बड़ी संख्या में खातों की मासिक किस्तें अचानक आनी बंद हो गईं। प्रारंभिक आंतरिक जांच में पता चला कि एक ही व्यक्ति से जुड़े करीब दो सौ ऋण प्रकरणों में समान तरह की गड़बड़ियां मौजूद हैं।
कंपनी सूत्रों के अनुसार, इन सभी मामलों में ट्रैक्टर लोन की फाइलें एक ही माध्यम से तैयार की गई थीं। दस्तावेजों की जांच करने पर कई आवेदन संदिग्ध पाए गए, जिनमें पते, आय संबंधी विवरण और गारंटी से जुड़े तथ्य एक जैसे या अप्रमाणित नजर आए। किस्तें समय पर न आने और संपर्क टूटने के बाद कंपनी ने पूरे नेटवर्क की पड़ताल शुरू की, जिससे यह मामला उजागर हुआ।
बताया जा रहा है कि आरोपी ने कथित रूप से किसानों और ग्रामीण लोगों के नाम पर ऋण स्वीकृत कराए और शुरुआती कुछ भुगतान के बाद रकम का दुरुपयोग किया। जैसे ही किस्तों का भुगतान रुक गया, कंपनी के रिकवरी विभाग ने फाइलों को खंगालना शुरू किया। इसके बाद मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा और कानूनी प्रक्रिया की तैयारी की गई।
फाइनेंस कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह केवल एक या दो मामलों तक सीमित न रहकर, सभी संबंधित ऋण फाइलों की विस्तृत जांच करवा रही है। इसके लिए बाहरी ऑडिट और कानूनी सलाह भी ली जा रही है, ताकि यह तय किया जा सके कि नुकसान की वास्तविक राशि कितनी है और जिम्मेदारी किस-किस पर बनती है।
इस प्रकरण ने ग्रामीण इलाकों में चल रहे लोन वितरण सिस्टम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त जांच और निगरानी नहीं की गई, तो ऐसे फर्जीवाड़े किसानों और वित्तीय संस्थानों दोनों के लिए गंभीर नुकसान का कारण बन सकते हैं।
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